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तुर्की में कश्मीर पर हुआ सम्मेलन, आतंकी बुरहान की तस्वीर और प्रोपगैंडा, एर्दोगन राज में एंटी इंडिया ताकतों को मंच

तुर्की की कश्मीर के मुद्दे पर नाक घुसेड़ने की आदत नहीं गई है. हाल ही में तुर्की के इस्तांबुल कश्मीर पर एक सम्मेलन आयोजित की गई थी. ये सारा खेल पाकिस्तान ने रचा था. इसमें सालों पुराने तस्वीरों और वीडियो को दिखाकर प्रोपगैंडा चलाने और दुनिया को बरगलाने की कोशिश की गई थी.

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इस्तांबुल में कश्मीर पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. (Photo: ITG)
इस्तांबुल में कश्मीर पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. (Photo: ITG)

पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाने वाला तुर्की एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे पर भारत विरोधी नैरेटिव को मंच देता नजर आया है. हाल ही में तुर्की के इस्तांबुल में कश्मीर पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें पाकिस्तान के राजनयिकों, कश्मीर अलगाववादी विचारों से जुड़े प्रतिनिधियों और विदेशी अकादमिक हस्तियों ने हिस्सा लिया. इस मंच से भारत विरोधी ताकतों ने खूब जहर उगले. सम्मेलन के दौरान दिखाई गई तस्वीरों में आतंकी बुरहान वानी भी शामिल था. इसके अलावा पुराने तस्वीरों से भी लोगों को बरगलाने की कोशिश की गई. 

इस कार्यक्रम को आयोजित करने में पाकिस्तान का अहम रोल रहा. 

सम्मेलन में कश्मीर को लेकर भारत की नीतियों, कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और हिंदुत्व विचारधारा के प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. इतना ही नहीं, कश्मीर के मुद्दे को फिलिस्तीन से जोड़कर पेश करने की भी कोशिश की गई.

खास बात यह है कि मानवाधिकार की बात करने वाले इन एजेंडेबाज लोगों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान सेना की फायरिंग पर मुंह न खुले. पाकिस्तान PoK में लगातार निर्दोष नागरिकों को मार रहा है.

गौरतलब है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन कई मौकों पर कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं.  एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में भी कश्मीर का मुद्दा उठाया है. 

इस सम्मेलन का आयोजन तुर्की के युवा संगठन TÜGVA (तुर्किये जेनक्लिक वक्फी) ने अपने मुख्यालय में किया. कार्यक्रम में पाकिस्तान के इस्तांबुल स्थित कॉन्सुल जनरल ख्वाजा खुर्रम नईम शामिल हुए. इसके अलावा कथित वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट के अध्यक्ष डॉ. मुजम्मिल अय्यूब थाकुर, इस्लाम एंड ग्लोबल अफेयर्स सेंटर के निदेशक डॉ. सामी अल एरियन और तुर्की रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष डॉ. एनेस बायराकली भी मौजूद रहे.

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सम्मेलन में तीन अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए. पहले सत्र में कश्मीर विवाद का क्षेत्रीय स्थिरता पर असर, शांति और न्याय की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा हुई. इसमें कथित वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट के अध्यक्ष मुजम्मिल अय्यूब ठाकुर, साउथ एशिया स्ट्रैटेजिक रिसर्च सेंटर के प्रमुख जमाल डेमिर और पाकिस्तान के इस्तांबुल कॉन्सुलेट के प्रतिनिधि उजैर महमूद घुम्मान शामिल हुए.

मुजम्मिल अय्यूब थाकुर ने इस कार्यक्रम में खूब गलतबयानी की. और उसने दावा किया कि वे लोगों को कश्मीर के मुद्दे पर जागृत करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.

दूसरे सत्र का विषय हिंदुत्व विचारधारा का क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव रखा गया. इस दौरान कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दों के बीच समानताएं और अंतर तलाशे गए. इस सत्र में डॉ. सामी अल एरियन और डॉ. एनेस बायराकली ने भी अपने विचार रखे. तीसरे सत्र में कश्मीर विवाद के अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई. 

इस आयोजन के जरिए कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने और भारत की नीतियों पर सवाल खड़े करने की कोशिश की गई.

हालांकि कार्यक्रम में शामिल किसी शख्स का ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे हंगामे की ओर नहीं गया. 

इस पत्रकार राजा मुनीब ने पाकिस्तान को फटकार लगाई है. 

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उन्होंने एक्स पर लिखा,"एक दशक पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल करके किसी मरे हुए नैरेटिव को ज़िंदा रखने की कोशिश करना, खुद पाकिस्तान और उसके प्यादों की हार है. असल में, आज कश्मीरी जिस अशांति और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, वह उस कश्मीर में हो रहा है जो पाकिस्तान के क्रूर कब्ज़े में है."

इस्तांबुल में हुए कार्यक्रम में आतंकी बुरहान वानी की तस्वीर थी. इसके अलावा सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करते लड़कों और लड़कियों की फोटो, वीडियो भी यहां लगाई गई थी. जम्मू-कश्मीर में 2011 में ही पत्थरबाजी की घटनाएं हुआ करती थी. 

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