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ईरान जंग कब खत्म किया जाए, नुकसान को जीत में कैसे बदला जाए... ट्रंप के एडवाइजर माथापच्ची में जुटे

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के अब सलाहकार इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं  कि ईरान पर 'जीत' का ऐलान कब और किस तरीके से की जाए. इसको लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर जमकर बहस हो रही है.

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मिडिल ईस्ट की जंग ने ट्रंप की बढ़ाईं मुश्किलें (Photo: AFP)
मिडिल ईस्ट की जंग ने ट्रंप की बढ़ाईं मुश्किलें (Photo: AFP)

मिडिल ईस्ट महाजंग की आंच पूरी दुनिया में साफ महसूस की जा रही है. अब यह युद्ध सिर्फ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच नहीं रह गया है. जंग की तपिश में लगभग पूरी दुनिया झुलस रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया तेल और एलपीजी क्राइसिस से परेशान है. ऐसे में अब अमेरिका पर जंग खत्म करने को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है.

ट्रंप के एक सलाहकार का कहना है कि कुछ अधिकारी ट्रंप को चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ती पेट्रोल कीमतें वॉशिंगटन को राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकती हैं. अब ईरान पर 'जीत' कब और कैसे घोषित की जाए, इस पर ट्रंप के सलाहकारों में बहस हो रही है.

'जीत' की घोषणा कब और किस तरीके पर बहस
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं  कि ईरान पर 'जीत' की घोषणा कब और किस तरीके से की जाए. व्हाइट हाउस के भीतर जंग को संभालने और ट्रंप के सार्वजनिक संदेश को तय करने को लेकर खींचतान चल रही है.

ट्रंप प्रशासन के भीतर चार अहम मुद्दों पर मतभेद हैं. इकोनॉमी से जुड़े अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी युद्ध के लिए घरेलू समर्थन को नुकसान पहुंचा सकती हैं. वहीं राजनीतिक सलाहकार ट्रंप से कह रहे हैं कि जीत को सीमित रूप में परिभाषित किया जाए. मिलिट्री ऑपरेशन को सीमित और लगभग समाप्ति के करीब बताया जाए. इन सलाहकारों में चीफ ऑफ स्टाफ सुजी वाइल्स शामिल हैं.

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सैन्य दबाव जारी रखने की भी वकालत
कड़ा रुख रखने वाले नेता जैसे रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और टॉम कॉटन ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने की वकालत कर रहे हैं. हालांकि स्टीव बैनन और कार्लसन जैसे सहयोगी ट्रंप से मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से बचने की सलाह दे रहे हैं.

यह बहस ऐसे समय हो रही है जब 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ यह महायुद्ध साल 2003 के इराक युद्ध के बाद से अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बन गया है. इस जंग ने वैश्विक तेल बाजारों को भी प्रभावित किया है.

ट्रंप ने दिए हैं अलग-अलग बयान
खुद ट्रंप ने हाल के दिनों में जंग को लेकर कई अलग-अलग बयान दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक रैली में कहा कि हम युद्ध जीत चुके हैं. लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि अमेरिका को काम पूरा करना होगा.

ट्रंप संभवतः अलग-अलग दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. एक तरफ कठोर रुख रखने वालों को यह भरोसा दिलाना कि अभियान जारी है. दूसरी तरफ बाजार को संकेत देना कि युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है. अपने राजनीतिक समर्थकों को आश्वस्त करना कि संघर्ष सीमित ही रहेगा.

हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए महज अटकलें करार दिया. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अभी भी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्यों को हासिल करने पर केंद्रित है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने चौंकाया
इधर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के एक्शन ने अमेरिका के साथ दुनिया के बाकी देशों की चिंता बढ़ा दी है. माना जा रहा है कि पेंटागन ने ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की तैयारी और क्षमता को काफी हद तक कम आंका.

CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने उस स्थिति के संभावित परिणामों का पूरी तरह आकलन नहीं किया, जिसे अब कुछ अधिकारी प्रशासन के सामने मौजूद सबसे खराब बता रहे हैं.

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