ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) देश की थियॉक्रेसी (धार्मिक शासन) में एक बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली बल बन चुका है. ये केवल सर्वोच्च नेता को जवाबदेह है, बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडार की देखरेख करता है और विदेशों में हमले शुरू करने की क्षमता रखता है. सुप्रीम लीडर की मौत के बाद सैन्य इकाइयां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है. IRGC की आर्थिक और सैन्य ताकत, साथ ही उसकी खुफिया गतिविधियां, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई हैं. इससे खाड़ी देशों में नाराजगी बढ़ी है और ईरान की आंतरिक नीतियां भी विवादास्पद बनी हुई हैं.
वर्तमान में ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों के जबरदस्त पलटवार, अपनी ताकत और स्वायत्तता को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी.
'क्रांति से हुआ जन्म'
ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान 'गार्ड' नामक बल का गठन हुआ, जिसका उद्देश्य देश की शिया धर्मगुरुओं द्वारा संचालित सरकार की रक्षा करना था. बाद में इसे देश के संविधान में शामिल कर लिया गया. ये ईरान के नियमित सशस्त्र बलों (आर्टेश) के समानांतर कार्य करता था और 1980 के दशक में इराक के साथ हुए लंबे और विनाशकारी युद्ध के दौरान इसकी प्रमुखता और ताकत में बढ़ोतरी हुई.
हालांकि, युद्ध के बाद इसे भंग करने की संभावना थी, लेकिन खामेनेई ने इसे निजी उद्यमों में विस्तार की अनुमति दी. इससे IRGC फल-फूल चला गया.
IRGC का आर्थिक साम्राज्य
IRGC खातम अल-अनबिया नामक एक विशाल निर्माण कंपनी चलाता है. इसके अलावा सड़कें बनाने, बंदरगाह संचालित करने, दूरसंचार नेटवर्क चलाने और यहां तक कि लेजर आई सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां भी हैं. ये ईरान की अर्थव्यवस्था में गहराई से घुसा हुआ है.
IRGC के ऑपरेशंस
IRGC की कुड्स फोर्स ने "एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस" (प्रतिरोध का अक्ष) बनाया, जो इजरायल और अमेरिका के खिलाफ है. इसने सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद, लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोहियों और अन्य समूहों को समर्थन दिया. साल 2003 में अमेरिका द्वारा इराक पर हमले के बाद इसकी शक्ति और बढ़ी.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कुद्स फोर्स ने इराकी आतंकवादियों को वहां अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ विशेष रूप से घातक सड़क-किनारे बम बनाने और उनका इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी थी. ऐसा माना जाता है कि कुद्स फोर्स और ईरानी खुफिया एजेंसियों ने असंतुष्टों और ईरान के कथित दुश्मनों को विदेशों में निशाना बनाने के लिए आपराधिक गिरोहों और अन्य लोगों को काम पर रखा था.
हाल के इजरायल-हमास युद्ध के बाद इजरायल ने कई नागरिकों को गिरफ्तार किया, जिन पर ईरान से आदेश मिलने का आरोप है. ईरान इन आरोपों से इनकार करता है. IRGC मध्य पूर्व में तस्करी में भी गहराई से शामिल है.
खुफिया सेवाएं
बता दें कि IRGC अपनी अलग खुफिया सेवाएं भी चलाता है. इसने कई दोहरी नागरिकता वाले और पश्चिमी संबंधों वाले लोगों को जासूसी के आरोप में बंद कमरों में गिरफ्तार किया और सजा दी. पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान इन कैदियों को परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में सौदेबाजी के चिप्स के रूप में इस्तेमाल करता है.
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने गार्ड की 'प्रतिरोध की धुरी' को सबसे बड़ी चुनौती दी है. इजरायल ने गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचाया है.
दिसंबर 2024 में सीरिया में असद सरकार के पतन ने गार्ड का एक प्रमुख सहयोगी छीन लिया. जून 2026 में इजरायल के भीषण हवाई हमलों ने गार्ड के शीर्ष जनरलों को मार गिराया और उनके बैलिस्टिक मिसाइल स्थलों और वायु रक्षा प्रणालियों को तहस-नहस कर दिया. इन हमलों ने इस शक्तिशाली संगठन के अंदर भारी अव्यवस्था पैदा कर दी है.
वहीं, ईरान के अंदर जब भी शासन के खिलाफ प्रदर्शन होते हैं तो उन्हें दबाने की जिम्मेदारी 'बसिज' को दी जाती है. बसिज रिवोल्यूशनरी गार्ड की ही एक स्वयंसेवी शाखा है. दिसंबर 2026 से शुरू हुए हालिया प्रदर्शनों के वीडियो में बसिज सदस्यों को लाठियों, डंडों और पेलेट गन्स के साथ प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से पीटते हुए देखा गया है.
एक बसिज कमांडर ने तो सरकारी टीवी पर आकर माता-पिता को चेतावनी दी कि वो अपने बच्चों को घर में रखें. इस खूनी दमन के कारण यूरोपीय संघ ने जनवरी में रिवोल्यूशनरी गार्ड को एक आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया था.
कौन करता है नियंत्रण
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हालिया बयानों ने दुनिया को चौंका दिया है. उन्होंने एक मार्च को एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि खामेनेई की मौत और हमलों के बाद सैन्य इकाइयां अब स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं. ओमान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों पर हुए हमलों के बाद अराघची ने अल जजीरा से कहा कि ये हमले सरकार की पसंद नहीं थे. उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी सैन्य इकाइयां अब 'अलग-थलग' हैं और पहले से दिए गए निर्देशों के आधार पर काम कर रही हैं. ये स्थिति खतरनाक है क्योंकि गार्ड के पास ईरान का विशाल मिसाइल और ड्रोन भंडार है, जिसका इस्तेमाल अब बिना किसी केंद्रीय नियंत्रण के हो सकता है.
खाड़ी देशों में बढ़ती नाराजगी
ईरान के पड़ोसी खाड़ी देश जो सालों से तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे, अब गार्ड की इन स्वतंत्र कार्रवाइयों से नाराज हैं. ओमान और कतर जैसे देशों पर हो रहे हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है.
अराघची के बयानों को तनाव कम करने के बहाने के रूप में भी देखा जा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड की स्वायत्तता पूरे मिडिल ईस्ट के लिए एक 'टाइम बम' बन गई है. पूरी दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि बिना किसी शीर्ष नेता के, ये शक्तिशाली बल अब क्या रुख अपनाता है.