ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग के बीच हाइफा रिफाइनरियों पर हमले ने चिंता बढ़ा दी है. हालांकि इजरायल ने नुकसान को सीमित बताया है, लेकिन ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर दिया है. इस बीच भारत और इजरायल के बीच उच्च स्तर पर बातचीत हुई है.
इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा कि उत्तरी क्षेत्र में पावर ग्रिड को हुआ नुकसान सीमित है. इस हमले का बहुत ज्यादा गंभीर प्रभाव नहीं है. प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति को तेजी से बहाल किया जा रहा है. जिन लोगों की बिजली कटी थी, उनमें में ज्यादातर की सप्लाई मिल चुकी है.
ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि मिसाइल हमलों के बावजूद देश के बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने इजरायल के तीसरे सबसे बड़े शहर हाइफा और अशदोद की रिफाइनरियों को निशाना बनाया है.
इसके साथ ही उसने कई सुरक्षा ठिकानों और सैन्य सहायता केंद्रों को भी निशाना बनाया है. उसने कहा, "इन ठिकानों पर मिसाइलों से सटीक हमला किया गया." अशदोद की रिफ़ाइनरी पर हमला हुआ या नहीं, इस पर तत्काल कोई जानकारी नहीं मिली है.
इस घटनाक्रम के बीच इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भारत में अपने समकक्ष एस. जयशंकर से फोन पर बात की है. उन्होंने वेस्ट एशिया में चल रहे हालात की जानकारी दी है. इजरायली विदेश मंत्री ने भारत के साथ रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी बताते हुए बेहद अहम करार दिया.
उन्होंने बातचीत के दौरान ईरान पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ईरानी शासन होर्मुज स्ट्रेट में आतंक फैला रहा है. यह केवल इजरायल या अमेरिका के लिए मुद्दा नहीं है.
उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा खतरा है. उनके मुताबिक, यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. इजरायली विदेश मंत्री ने ईरान पर मध्य पूर्व और यूरोप के देशों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का भी आरोप लगाया.
वेस्ट एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए. इनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष कमांडर मार दिए. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल समेत खाड़ी देशों में हमले शुरू कर दिए.