मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रही है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ऐसा दबाव बना दिया है कि वैश्विक तेल और गैस सप्लाई लगभग ठप सी हो गई है. यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई होती है. इसका सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों पर पड़ा है. कुवैत, सऊदी अरब, यूएई और इराक जैसे देश, जो इसी रास्ते से तेल निर्यात करते हैं, अब उत्पादन घटाने को मजबूर हो गए हैं.
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के सीईओ शेख नवाफ सऊद अल-सबाह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह सिर्फ खाड़ी देशों पर हमला नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा है. यह हमारे देश, हमारे लोगों और हमारे संसाधनों पर सीधा हमला है." उन्होंने यह भी कहा, "इमरजेंसी कदम जो उठाए जा रहे हैं, वे सामान्य तेल सप्लाई के मुकाबले बैरल में एक बूंद के बराबर भी नहीं हैं."
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यूएई की सरकारी कंपनी ADNOC के सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर ने और सख्त शब्दों में कहा, "होर्मुज़ स्ट्रेट को हथियार बनाना सिर्फ एक देश के खिलाफ आक्रामकता नहीं है, यह हर देश के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद है. किसी भी देश को यह हक नहीं होना चाहिए कि वह पूरी दुनिया को बंधक बनाए."
तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंची
ईरान के हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है. मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते कई इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए हैं. विश्लेषकों का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई डिसरप्शन है, जिसने तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया. कुवैत, जो पहले रोजाना करीब 2.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता था, अब उत्पादन घटाने के साथ "फोर्स मेज्योर" या कहें कि एक तरह की मुश्किल घड़ी घोषित करने को मजबूर हुआ है.
किसी एक का नहीं, दुनिया का स्ट्रेट है होर्मुज!
शेख नवाफ अल-सबाह ने चेतावनी दी, "होर्मुज का कोई विकल्प नहीं है. पाइपलाइन या रिजर्व स्टॉक जैसे विकल्प इस कमी को पूरा नहीं कर सकते. ये कदम अस्थायी भी नहीं हैं, बल्कि जरूरत के सामने बेहद कम हैं." उन्होंने आगे कहा, "यह सिर्फ तेल की समस्या नहीं है. सप्लाई चेन टूट रही है, उर्वरकों की कीमतें बढ़ेंगी और इससे दुनिया भर में खाद्य संकट पैदा हो सकता है." उन्होंने आगे कहा, "यह किसी एक का स्ट्रेट नहीं है. यह इंटरनेशनल कानून और प्रैक्टिकल सच्चाई के तहत दुनिया का स्ट्रेट है."
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ईरान के निशाने पर खाड़ी मुल्क
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया है. यूएई के मुताबिक, अब तक सैकड़ों मिसाइल और हजारों ड्रोन दागे जा चुके हैं. कुल मिलाकर, होर्मुज पर जारी तनाव ने यह साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक क्षेत्रीय जंग नहीं रही. इसका असर हर देश की अर्थव्यवस्था, हर आम आदमी की जेब और दुनिया की स्थिरता पर पड़ रहा है, और इससे अब अरब मुल्कों की नाराजगी बढ़ रही है.