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ईरान में एक साल तक खिंच सकती है जंग... मोसाद ने पहले ही नेतन्याहू को किया था अलर्ट

मिडिल ईस्ट जंग के बीच नई इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी नहीं, बल्कि करीब एक साल लग सकता है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति पर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे इतनी लंबी जंग के लिए तैयार हैं?

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मोसाद चीफ का कहना है कि सत्ता परिवर्तन में एक साल लगेगा. (File Photo)
मोसाद चीफ का कहना है कि सत्ता परिवर्तन में एक साल लगेगा. (File Photo)

मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब धीरे-धीरे एक लंबी लड़ाई में बदलती नजर आ रही है. शुरुआत में जहां यह माना जा रहा था कि ईरान की सत्ता जल्दी गिर सकती है, वहीं अब नई इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने जंग शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि ईरान में "रेजीम चेंज" संभव तो है, लेकिन इसमें समय लगेगा. उनका आकलन था कि यह प्रक्रिया कुछ दिनों या हफ्तों में नहीं, बल्कि करीब एक साल तक खिंच सकती है.

बार्निया ने इजरायली कैबिनेट के सामने जंग के कई संभावित नतीजे रखे थे, जिनमें कुछ महीनों का समय भी शामिल था, लेकिन सबसे वास्तविक अनुमान एक साल का ही माना गया. हालांकि, जंग शुरू होने के बाद तस्वीर कुछ और ही दिखाई गई. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान में कुछ ही दिनों में विद्रोह भड़क सकता है और सरकार गिर सकती है, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ.

रिपोर्ट्स की मानें तो तीन हफ्ते बीतने के बाद हालात यह हैं कि ईरान की सत्ता कमजोर जरूर हुई है, लेकिन अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में है. यही वजह है कि अब इजरायल और अमेरिका दोनों की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. इस बीच, मोसाद चीफ पर भी निशाना साधा जा रहा है. रिपोर्ट्स में कुछ अज्ञात सूत्रों के जरिए उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरकार को गलत उम्मीदें दीं. हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि उनका आकलन हमेशा सतर्क और शर्तों पर आधारित था, न कि कोई पक्की भविष्यवाणी.

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दरअसल, ईरान में सत्ता परिवर्तन इतना आसान नहीं है. इसके लिए कई शर्तें जरूरी हैं, जैसे शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करना, सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाना और जनता के विरोध को बढ़ाना, और यह सब एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है.

अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने भी हाल ही में कहा कि ईरान की सरकार "कमजोर जरूर हुई है, लेकिन अभी भी कायम है." वहीं बेंजामिन नेतन्याहू ने भी माना कि "हम हालात बदलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह निश्चित नहीं है कि सरकार गिरेगी या नहीं."

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इज़रायल और अमेरिका इतनी लंबी जंग के लिए तैयार हैं? क्योंकि अगर यह लड़ाई साल भर या उससे ज्यादा चली, तो इसका असर सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, राजनीति और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ेगा. रिपोर्ट्स से फिलहाल इतना साफ है कि ईरान में कोई भी बड़ा बदलाव अचानक नहीं होगा. अगर बदलाव आया भी, तो वह धीरे-धीरे और लंबे समय में ही सामने आएगा. यही इस जंग की सबसे बड़ी सच्चाई बनती जा रही है.

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