
अमेरिका और ईरान के बीच जंग पर भले ही ब्रेक लग गया हो, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है. जहां एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस सीजफायर का श्रेय लेते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए. इससे साफ हो गया कि यह युद्धविराम अधूरा है और लेबनान के मोर्चे पर लड़ाई अभी जारी है.
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के सीजफायर का ऐलान किया था, जिसमें उन्होंने खुद माना कि पाकिस्तान की मध्यस्थता ने अहम भूमिका निभाई. इसके बाद शहबाज शरीफ ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह सीजफायर "हर मोर्चे पर लागू" होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है.
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पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान और अमेरिका, अपने साथियों के साथ, लेबनान और दूसरी जगहों सहित हर जगह तुरंत सीजफायर पर सहमत हो गए हैं, जो तुरंत लागू होगा." उन्होंने आगे यह भी बताया कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी, जहां स्थायी समाधान की दिशा में कोशिश की जाएगी.

बेंजामिन नेतन्याहू ने सीजफायर पर क्या कहा?
कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल गई. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने साफ कर दिया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता. इजरायल ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ हमले रोकने के अमेरिकी फैसले का समर्थन करता है, लेकिन लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी.
इजरायली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के तटीय शहर टायर में रहने वाले लोगों को तुरंत इलाके खाली करने का आदेश दिया. सेना के प्रवक्ता ने एक्स पर चेतावनी देते हुए कहा, "टायर शहर के निवासियों, खासकर शबरीहा के निवासियों के लिए अर्जेंट चेतावनी... आपको तुरंत अपने घर खाली करने होंगे." इसके साथ एक मैप भी जारी किया गया, जिसमें संभावित हमले के टारगेट दिखाए गए.
पहले से ही पूरे दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर इवैक्युएशन ऑर्डर लागू है, और हाल के हफ्तों में लोगों को बार-बार घर छोड़ने के लिए कहा गया है. इस बीच लेबनान में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. इजरायली हमलों में अब तक करीब 1500 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. राजधानी बेरूत समेत कई इलाकों में लोग अब भी डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं.

लेबनान कैसे बना इजरायल का टारगेट?
लेबनान इस जंग में सीधे तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमले शुरू किए, तो ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह ने समर्थन में इजरायल पर रॉकेट दागे. इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी हमले शुरू कर दिए.
हालांकि, सीजफायर के ऐलान के बाद हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल और लेबनान में इजरायली सैनिकों पर फायरिंग रोक दी. रॉयटर्स के मुताबिक, यह कदम पहले से तय समझौते का हिस्सा था. लेकिन इजरायल के लगातार हमलों से यह साफ हो गया है कि जमीनी हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं. इनके अलावा, लेबनान के हिजबुल्लाह MP इब्राहिम मौसवी ने भी कहा कि अगर इजरायल सीजफायर का पालन नहीं करता है तो कोई भी इसके लिए तैयार नहीं होगा.
क्या सीजफायर से खत्म होगी मिडिल ईस्ट की जंग
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सीजफायर वास्तव में शांति की ओर कदम है या सिर्फ एक अस्थायी विराम. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने यह तो पुष्टि की कि इजरायल ने ईरान पर हमले रोकने पर सहमति जताई है, लेकिन लेबनान को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया. यही वजह है कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान और इजरायल के दावों में खुला विरोधाभास सामने आया है.