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अमेरिका-ईरान के सीजफायर पर क्या बोले दुनिया भर के देश, किसने दी पाकिस्तान को शाबाशी

अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आई हैं. पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका की सराहना हुई है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहले की धमकियों पर सवाल उठे हैं. कई देशों ने इसे सकारात्मक कदम बताया.

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कहा जा रहा है कि युद्धविराम में पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई. (Photo- Reuters)
कहा जा रहा है कि युद्धविराम में पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई. (Photo- Reuters)

अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के सीजफायर के बाद अब दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. यह समझौता ऐसे समय में हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही घंटे पहले ईरान की "सभ्यता मिटा देने" जैसी धमकी दे चुके थे. अचानक आए इस बदलाव ने वैश्विक नेताओं को हैरान कर दिया, लेकिन ज्यादातर देशों ने इसे राहत के रूप में देखा है. इसमें पाकिस्तान की भूमिका का भी कई देशों ने अपने बयानों में जिक्र किया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक दो हफ्तों के लिए युद्धविराम का ऐलान किया और ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को कारगर बताया. दुनिया के कई बड़े नेता अब तक अमेरिका की इन धमकियों पर चुप थे, लेकिन अब सीजफायर के बाद कई देशों ने पाकिस्तान को इस समझौते में उसकी कूटनीतिक भूमिका और संघर्ष खत्म कराने के लिए बधाई दी.

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ऑस्ट्रेलियाऑस्ट्रेलिया ने इस समझौते का स्वागत किया है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने संयुक्त बयान में कहा, "ऑस्ट्रेलियाई सरकार काफी समय से तनाव कम करने और इस संघर्ष को खत्म करने की मांग कर रही है." उन्होंने आगे कहा, "होर्मुज स्ट्रेट के वास्तविक रूप से बंद होने, जहाजों, नागरिक ढांचे और तेल-गैस सुविधाओं पर हमलों के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर अभूतपूर्व झटका लगा है और तेल और ईंधन की कीमतें प्रभावित हुई हैं."

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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए काम कर रहा था, ताकि जरूरी आपूर्ति उन लोगों तक पहुंच सके जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. अल्बनीज ने ट्रंप की भाषा पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित है. और मुझे लगता है कि इससे चिंता पैदा होगी."

मलेशिया: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इस समझौते का जोरदार स्वागत किया और कहा, "यह प्रस्ताव न सिर्फ क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अच्छा संकेत है." उन्होंने आगे लिखा, "यह दिल से उम्मीद की जाती है कि बातचीत की प्रक्रिया ईमानदारी के साथ की जाएगी और क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने का मजबूत संकल्प होगा. शांति वार्ता तब सफल नहीं हो सकती जब तक इसकी प्रक्रिया धोखे और दोहरे खेल वाली ना हो."

इब्राहिम ने क्षेत्रीय प्रभावों पर भी कहा, "यह जरूरी है कि 10 सूत्रीय योजना को एक शांति समझौते में बदला जाए, सिर्फ ईरान के लिए नहीं बल्कि इराक, लेबनान और यमन के लिए भी ऐसा ही किया जाए. इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि फिलिस्तीन के लोगों, खासकर गाजा में, नरसंहार और विस्थापन को खत्म किया जाए."

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उन्होंने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा, "पाकिस्तान की कूटनीति साहसिक रही है." उन्होंने आगे कहा, "बिना किसी डर या पक्षपात के सभी पक्षों से बात करने की पाकिस्तान की इच्छा मुस्लिम एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी की सर्वोच्च परंपराओं को दर्शाती है. मलेशिया इस दिशा में हर प्रयास का समर्थन करने के लिए तैयार है." उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की, "इस युद्ध से प्रभावित सभी नागरिकों तक बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंचाई जानी चाहिए. यह एक ऐसा मोड़ होना चाहिए जो स्थायी शांति की ओर ले जाए. दुनिया इससे कम कुछ भी बर्दाश्त नहीं कर सकती."

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मिस्र: मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा, "यह एक बहुत महत्वपूर्ण अवसर है जिसे बातचीत, कूटनीति और रचनात्मक संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए." मंत्रालय ने कहा, "इस संघर्ष विराम को मजबूत आधार बनाकर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकनी होगी और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना होगा."

जापान: जापान ने भी ईरान में युद्धविराम का स्वागत किया. जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा, "हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं, यह एक सकारात्मक कदम है."

न्यूजीलैंड: न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा, "हालांकि यह उत्साहजनक खबर है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थायी सीजफायर सुनिश्चित करने के लिए अभी काफी महत्वपूर्ण काम किया जाना बाकी है." उन्होंने आगे कहा, "हम पाकिस्तान और अन्य देशों जैसे तुर्किये और मिस्र के काम के लिए आभारी हैं, जिन्होंने इस संकट का समाधान खोजने की कोशिश की."

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दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया ने कहा, "हमें उम्मीद है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफलतापूर्वक पूरी होगी और मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता जल्द बहाल होगी." साथ ही यह भी कहा, "होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सभी जहाजों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए."

कजाकिस्तान: कजाकिस्तान के कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने कहा, "मध्य पूर्व में पूर्ण सीजफायर और संघर्ष विराम के समझौते का स्वागत करता हूं, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की मध्यस्थता से संभव हुआ." उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता लंबा चलेगा और वैश्विक व्यापार व आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देगा.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस सीजफायर का स्वागत किया. उनके प्रवक्ता ने कहा, "सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें और सीजफायर की शर्तों का सम्मान करें, ताकि क्षेत्र में स्थायी और व्यापक शांति का रास्ता तैयार हो सके." उन्होंने यह भी कहा, "नागरिकों की जान बचाने और मानवीय पीड़ा कम करने के लिए हिंसा का अंत बेहद जरूरी है."

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