
मध्य पूर्व में सीजफायर और वैश्विक सप्लाई संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. करीब सात साल बाद ईरान से कच्चे तेल की सप्लाई फिर शुरू होने जा रही है, और इस बार कहानी में एक दिलचस्प मोड़ भी है. जो तेल पहले चीन जा रहा था, वही अब भारत की ओर मुड़ गया है.
जानकारी के मुताबिक, क्यूरेको फ्लैग वाला एक बड़ा तेल टैंकर "जया" अब भारत के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है. यह वही जहाज है, जो पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के रास्ते चीन की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अचानक उसने अपना रास्ता बदल लिया. शिपिंग डेटा से साफ है कि यह बदलाव किसी सामान्य व्यापारिक फैसले से ज्यादा, बदलते वैश्विक हालात का संकेत है.
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इस तेल की खरीद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने की है, जो देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी है. हालांकि कंपनी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि भारत ने फिर से ईरानी तेल को अपने इंपोर्ट पोर्टफोलियो में शामिल करना शुरू कर दिया है.

सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि "जॉर्डन" नाम का एक और टैंकर भी भारत की ओर बढ़ रहा है, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह कोई एक बार की डील नहीं, बल्कि एक ट्रेंड की शुरुआत हो सकती है. दरअसल, भारत ने आखिरी बार मई 2019 में ईरान से तेल खरीदा था. उस समय अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के चलते भारतीय कंपनियों को यह आयात रोकना पड़ा था. इसके बाद भारत ने अपनी जरूरतों के लिए सऊदी अरब, इराक और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भरता बढ़ा दी थी.
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्तों पर दबाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. इसी को देखते हुए अमेरिका ने अस्थायी तौर पर ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, ताकि बाजार में स्थिरता लाई जा सके.
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इस फैसले का सीधा फायदा भारत को मिला है. भारतीय रिफाइनर लंबे समय से सस्ते और स्थिर सप्लाई की तलाश में थे, और ईरान हमेशा से उन्हें बेहतर शर्तों पर तेल देता रहा है. ऐसे में यह वापसी भारतीय बाजार के लिए फायदेमंद मानी जा रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के तेल मंत्रालय ने भी संकेत दिया है कि घरेलू रिफाइनर अब ईरान से तेल खरीदने लगे हैं. खास बात यह है कि पेमेंट सिस्टम में भी फिलहाल कोई बड़ी बाधा नहीं है, जो पहले सबसे बड़ी समस्या हुआ करती थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी तेल की वापसी से भारत को दो बड़े फायदे होंगे. पहला, तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी, और दूसरा, सप्लाई का जोखिम कम होगा. मौजूदा समय में जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है.