अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिश तेज कर दी है. ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में दावा किया है कि ईरान के साथ शुक्रवार को फिर से बातचीत हो सकती है. इसके अलावा ईरान को कुछ दिनों का सीमित युद्धविराम प्रस्तावित किया गया है. लेकिन तेहरान के भीतर सत्ता संघर्ष, सैन्य और राजनीतिक धड़ों की खींचतान ने बातचीत को जटिल बना दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ईरानियों को अपनी स्थिति संभालने के लिए तीन से पांच दिन का एक और सीजफायर देने को तैयार हैं. यह अनिश्चितकालीन नहीं होगा. यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन का मानना है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अभी भी किसी समझौते की ओर बढ़ सकती है.
खासकर ईरान के बचे हुए परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर समाधान की संभावना बनी हुई है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों को यह भी चिंता है कि तेहरान में ऐसा कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं है जो किसी अंतिम निर्णय को मंजूरी दे सके. ईरान के भीतर सत्ता का संतुलन बिखरा हुआ दिख रहा है.
मोजतबा खामेनेई सीमित स्तर पर ही संवाद कर रहे हैं. वहीं IRGC के जनरल और नागरिक वार्ताकार रणनीति को लेकर खुले तौर पर एक-दूसरे के विरोध में हैं. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "हमने देखा है कि ईरान के भीतर वार्ताकारों और सेना के बीच पूरी तरह दरार पड़ गई है.''
उनका कहना है कि दोनों पक्षों की पहुंच सर्वोच्च नेतृत्व तक नहीं है, जो किसी भी बात का जवाब नहीं दे रहा. अमेरिकी अधिकारियों ने यह दरार सबसे पहले इस्लामाबाद वार्ता के पहले दौर के बाद नोटिस की थी. उस समय यह स्पष्ट हुआ कि IRGC कमांडर जनरल अहमद वाहिदी असरदार है.
उनके सहयोगियों ने ईरानी वार्ताकारों द्वारा की गई कई चर्चाओं को खारिज कर दिया था. यह मतभेद बाद में गहरा हो गया, जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज को फिर से खोलने की घोषणा कर दी. लेकिन IRGC ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया और उनकी आलोचना शुरू कर दी.
इसके बाद के दिनों में ईरान ने अमेरिका के नए प्रस्ताव पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी. साथ ही पाकिस्तान में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने की प्रतिबद्धता भी नहीं जताई.