अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर जिस MoU पर ट्रंप और पेजेश्कियान ने साइन किए हैं. उसका पूरा ब्योरा अब सार्वजनिक हो गया है. इसे अमेरिका की ओर से रिलीज किया गया. इसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से लेकर ईरान पर लगी कुछ आर्थिक पाबंदियों में ढील देने और परमाणु मुद्दों पर चर्चा का जिक्र किया गया है.
अमेरिका और ईरान के बीच MoU पर आधिकारिक तौर पर साइन हो चुके हैं, इसमें 14 पॉइंट्स हैं. इसका 5वां पॉइंट्स सबसे अहम है. इस पॉइंट में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फिलहाल तो कोई टोल लगाने का जिक्र नहीं है. लेकिन इसमें भविष्य में टोल लगाने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया गया है.
क्या कहता है 5वां पॉइंट?
14 पॉइंट के इस MoU का 5वां पॉइंट कहता है, 'इस MoU पर साइन होने के बाद ईरान अपनी पूरी कोशिश करेगा कि कमर्शियल जहाज बिना किसी टोल के सिर्फ 60 दिनों के लिए फारस की खाड़ी से ओमान सागर और ओमान सागर से फारस की खाड़ी तक सुरक्षित रूप से आ-जा सकें.'
इसमें कहा गया है, 'जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू हो जाएगी, लेकिन रास्ते में जो टेक्निकल और मिलिट्री रुकावटे हैं और बारूदी सुरंगे हैं, उन्हें हटाने में ईरान 30 दिन लेगा.'
इस पॉइंट में आगे जो कहा गया है, वह बहुत अहम है. इसमें आगे कहा गया है, 'ईरान ओमान के साथ बातचीत करके कि होर्मुज स्ट्रेट का आगे का मैनेजमेंट कैसे होगा. इसमें फारस की खाड़ी से सटे बाकी देशों के साथ भी चर्चा की जाएगी. यब सब कुछ अंतरराष्ट्रीय कानून और होर्मुज के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों का ध्यान रखा जाएगा.'
इसका मतलब क्या हुआ?
होर्मुज स्ट्रेट वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल सप्लाई होता है. 28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने इसे बंद कर दिया था. इस कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई ठप पड़ गई.
5वें पॉइंट का साफ-साफ मतलब यही है कि MoU पर साइन होने के बाद 30 दिन के भीतर रास्ते में बिछाए गए माइंस को हटाया जाएगा. 60 दिन में अमेरिका और ईरान के बीच फाइनल डील होगी, तब तक होर्मुज से गुजरने वाले रास्तों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा.
लेकिन उसके बाद ओमान और होर्मुज से सटे बाकी देशों के साथ मिलकर एक मैनेजमेंट तय किया जाएगा. यानी, हो सकता है कि 60 दिन बाद ईरान और ओमान मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाएं, जिससे होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल वसूला जाएगा.