मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच बुधवार को एक बड़ा और खतरनाक मोड़ सामने आया, जब ईरान के विशाल पार्स गैस फील्ड पर हमला हुआ. यह पहली बार है जब खाड़ी क्षेत्र में ईरान के ऊर्जा ढांचे को सीधे निशाना बनाया गया है. इस घटना को अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध के दौरान एक बड़े एस्केलेशन के रूप में देखा जा रहा है. पार्स गैस फील्ड दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार का हिस्सा है, जिसे ईरान कतर के साथ साझा करता है. ईरान की फर्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, हमले में गैस टैंकों और रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. इसके बाद वहां काम कर रहे कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया और आग बुझाने के लिए इमरजेंसी टीमों को लगाया गया.
हमले के बाद ईरान का रुख और ज्यादा सख्त हो गया है. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने बयान में कहा कि लारिजानी के खून का बदला जल्द लिया जाएगा और इसके जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरान की धमकी के बाद खाड़ी क्षेत्र में भी हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक कतर के रास लफान स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों को खाली कराया जा रहा है. यह कदम ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिससे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है.
बता दें, ईरान ने सऊदी अरब की SAMREF रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई के अल होसन गैस फील्ड और कतर के रास लाफान रिफाइनरी व मेसईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को संभावित निशाने के तौर पर चुना है. इन ठिकानों पर हमले की चेतावनी के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और सतर्कता बढ़ गई है.
ईरान के पार्स गैस फील्ड पर हमला, मिडिल ईस्ट युद्ध में बड़ा एस्केलेशन
इस हमले को लेकर इजराइली मीडिया में दावा किया गया कि यह हमला इजराइल ने अमेरिका की सहमति से किया है, हालांकि इजराइली सेना ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी. वहीं कतर ने इसे इजराइल का हमला बताया और इसे खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना कदम करार दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है.
NEW - Fires rage at the world's largest natural gas field South Pars, Iran, struck by Israeli-American forces, multiple phases of processing capacity critically hit and taken offline. pic.twitter.com/12MjBkM89b
— Disclose.tv (@disclosetv) March 18, 2026
हमले के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर को सीधी चेतावनी दी है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इन देशों के कई ऊर्जा ठिकाने अब सीधे निशाने पर हैं और आने वाले घंटों में उन पर हमला किया जा सकता है. ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, लोगों और कर्मचारियों से इन इलाकों को तुरंत खाली करने की अपील की गई है.
ईरान ने जिन ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, उनमें सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैस फील्ड और कतर के मेसाइद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, मेसाइद होल्डिंग कंपनी और रास लफान रिफाइनरी शामिल हैं.
इजराइल-ईरान टकराव खतरनाक मोड़ पर, गैस फील्ड पर हमले से बढ़ा वैश्विक तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पिछले तीन हफ्तों से अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान का युद्ध चल रहा है. अब तक इस संघर्ष में ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने से बचा जा रहा था, क्योंकि इससे वैश्विक बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता था. लेकिन इस हमले के बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं.
इसी दौरान इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी बड़े हवाई हमले किए. रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में कई अपार्टमेंट इमारतें तबाह हो गईं, जो पिछले कई दशकों में सबसे तीव्र हमलों में से एक हैं. लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है.
इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मार गिराया है, जिसकी पुष्टि बाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी की. इससे एक दिन पहले इजराइल ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को भी निशाना बनाया था.
गैस फील्ड से लेकर मिसाइल हमलों तक, ईरान-इजराइल संघर्ष ने पकड़ी रफ्तार
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि अब ईरान में कोई भी सुरक्षित नहीं है और सभी निशाने पर हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर उन्होंने सेना को किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को निशाना बनाने की अनुमति दे दी है, बिना किसी अतिरिक्त मंजूरी के.
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल पर मिसाइल हमले किए. इजराइली अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में तेल अवीव के पास दो लोगों की मौत हो गई. वहीं ईरान ने दावा किया कि उसने तेल अवीव, हाइफा और बेर्शेबा के साथ-साथ बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया.
इस पूरे संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिका में डीजल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई है, जो 2022 के बाद पहली बार हुआ है. ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा ने वैश्विक बाजार को झकझोर कर रख दिया है.
मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक ईरान में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लेबनान में 900 लोगों की मौत हुई है और करीब 8 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. वहीं इजराइल में भी 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.
पार्स गैस फील्ड पर हमला और फिर धमकी, खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा
इस बीच तेहरान में अली लारिजानी और अन्य मारे गए लोगों के लिए अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतरे. लोगों ने झंडे और तस्वीरें लेकर शोक जताया. मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. पार्स गैस फील्ड पर हमला और उसके बाद ईरान की चेतावनी इस बात का संकेत है कि यह संघर्ष अब और बड़े स्तर पर फैल सकता है. फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में जाती है.