ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अमेरिका की पुरानी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने पिछले साल यूक्रेन के उस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया था, जिसमें ईरान के शाहेद ड्रोन को मार गिराने की तकनीक साझा करने की पेशकश की गई थी. अब अमेरिकी अधिकारी मान रहे हैं कि यह फैसला बड़ी रणनीतिक गलती साबित हुआ.
रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन ने अमेरिका को ऐसी तकनीक देने की पेशकश की थी, जिसका इस्तेमाल वह पहले ही युद्ध में कर चुका था. यह तकनीक खास तौर पर ईरान के शाहेद ड्रोन को रोकने के लिए तैयार की गई थी, लेकिन उस समय ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया. अब जब ईरानी ड्रोन हमले बढ़ गए हैं, तो अमेरिका को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उस समय यूक्रेन के प्रस्ताव को ठुकराना ट्रंप प्रशासन की बड़ी भूल थी. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर ईरान के साथ मौजूदा युद्ध से पहले अमेरिका ने कोई बड़ी गलती की है, तो वह यही फैसला था कि उसने यूक्रेनी तकनीक को ठुकरा दिया.
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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 18 अगस्त को व्हाइट हाउस में एक बंद कमरे की बैठक हुई थी. इस बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के सामने एक योजना रखी थी. उन्होंने इंटरसेप्टर ड्रोन और उनसे जुड़ी तकनीक साझा करने का प्रस्ताव दिया था. यूक्रेनी टीम ने एक प्रस्तुति के जरिए यह भी बताया था कि ईरान लगातार अपने शाहेद वन-वे अटैक ड्रोन को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है.
यूक्रेन ने सुझाव दिया था कि तुर्की, जॉर्डन और खाड़ी देशों में ऐसे ड्रोन सुरक्षा केंद्र बनाए जाएं, जहां पहले से अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इन केंद्रों में रडार और इंटरसेप्टर ड्रोन तैनात किए जा सकते थे, ताकि ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के ड्रोन हमलों को रोका जा सके.
एक यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि उनका मकसद "ड्रोन की दीवार" बनाना था, जिससे दुश्मन के ड्रोन हमलों को पहले ही रोक दिया जाए. इसके लिए जरूरी रडार और सिस्टम तैयार करने की भी योजना थी.
हालांकि उस समय अमेरिका ने इस योजना पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने बैठक के दौरान अपनी टीम से इस पर काम करने को कहा था, लेकिन बाद में इसे आगे नहीं बढ़ाया गया. कुछ अधिकारियों का मानना है कि जेलेंस्की को लेकर संदेह की वजह से भी इस प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया गया.
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अब हालात बदल चुके हैं. ईरान के सस्ते लेकिन बेहद असरदार शाहेद ड्रोन युद्ध में बड़ा खतरा बन गए हैं. इन ड्रोन की कीमत करीब 20 हजार से 50 हजार डॉलर के बीच होती है, लेकिन यह बड़े सैन्य ठिकानों और अहम ढांचे को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे ड्रोन हमलों में सात अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हो चुकी है.
यूक्रेन लंबे समय से रूस के साथ युद्ध में इसी तरह के ड्रोन का सामना कर रहा है. इसी वजह से उसने कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन और दूसरे एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित किए हैं. अब बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका ने भी यूक्रेन से इस क्षेत्र में मदद मांगनी शुरू कर दी है.
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब अपना एंटी-ड्रोन सिस्टम "मेरोप्स" तैनात करने की योजना बना रहा है और दूसरे उपायों पर भी काम कर रहा है. वहीं यूक्रेन ने पहले ही मदद शुरू कर दी है. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन और विशेषज्ञ भेजे हैं.
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूक्रेन उन साझेदार देशों की मदद करता है, जो उसकी सुरक्षा में उसका साथ देते हैं. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि शाहेद ड्रोन से निपटने में यूक्रेन का अनुभव अब भी मध्य पूर्व में चल रहे इस संघर्ष में अहम साबित हो सकता है.