ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जो इस वक्त ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत में हैं, ने इजरायल के साथ कथित गठजोड़ के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में यूएई भी सक्रिय साझेदार है. अराघची का यह बयान तब आया है जब बुधवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान वो यूएई के गुप्त दौरे पर गए थे जहां राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से उनकी मुलाकात हुई थी.
नेतन्याहू के इस खुलासे पर ईरान भड़क गया है और भारत पहुंचे उसके विदेश मंत्री ने कहा, 'इजरायल के साथ गठबंधन भी आपको नहीं बचा सका, ईरान के प्रति अपनी नीति पर फिर से विचार करें.'
अराघची ने कहा, 'कल ही यह खुलासा हुआ कि युद्ध के दौरान नेतन्याहू ने यूएई और अबू धाबी का दौरा किया था. यह भी सामने आया कि उन्होंने इन हमलों में हिस्सा लिया और संभव है कि सीधे हमारे खिलाफ कार्रवाई भी की हो. इसलिए यूएई इस आक्रामकता में सक्रिय साझेदार है और इसमें कोई संदेह नहीं है. जब यह हमला शुरू हुआ, तब उन्होंने इसकी निंदा तक करने से इनकार कर दिया.'
उन्होंने आगे कहा, 'उन्होंने यूएई की जमीन का इस्तेमाल हमारे खिलाफ तोपखाने और हथियार दागने के लिए होने दिया.'
नेतन्याहू ने 'गुप्त दौरे' का किया दावा, यूएई का इनकार
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा कि उन्होंने इसी साल अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के दौरान यूएई की एक गुप्त यात्रा की थी और वहां यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की थी.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि इस मुलाकात से इजरायल और अबू धाबी के रिश्तों में ऐतिहासिक सफलता मिली है. हालांकि, यूएई ने नेतन्याहू की यात्रा से इनकार करते हुए पीएमओ के बयान को 'पूरी तरह निराधार' बताया है.
इस खुलासे ने युद्ध के दौरान दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को उजागर किया. बुधवार को आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि इजरायल की दो प्रमुख खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों ने भी गुप्त रूप से यूएई का दौरा किया था, ताकि ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूएई की रक्षा और जवाबी क्षमता को मजबूत करने में मदद की जा सके.
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि नेतन्याहू और बिन जायद की मुलाकात 26 मार्च को ओमान सीमा के पास स्थित अल-ऐन शहर में हुई थी और यह बैठक कई घंटों तक चली.
इसके जवाब में यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'यूएई ये बात दोहराता है कि इजरायल के साथ उसके संबंध सबके सामने हैं और आधिकारिक तौर पर घोषित अब्राहम समझौतों के ढांचे के भीतर संचालित होते हैं. ये किसी गुप्त या अनौपचारिक व्यवस्था पर आधारित नहीं हैं.'
मंत्रालय ने आगे कहा, 'इसलिए बिना घोषित यात्राओं या गुप्त समझौतों से जुड़े किसी भी दावे का कोई आधार नहीं है, जब तक कि यूएई की संबंधित एजेंसियां आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि न करें.'
यूएई के इनकार पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू के पूर्व प्रवक्ता जिव अगमोन ने कहा कि प्रधानमंत्री का दावा सही है.
उन्होंने फेसबुक पर लिखा, 'मैं यूएई को अच्छी तरह जानता हूं और वहां लंबे समय तक रहा हूं. मैं उस ऐतिहासिक यात्रा में प्रधानमंत्री के साथ था, जो आज तक बेहद गोपनीय रखी गई थी. मैं कह सकता हूं कि अबू धाबी में प्रधानमंत्री का स्वागत राजाओं जैसी शान से किया गया.'
ईरान ने कहा- नेतन्याहू के यूएई दौरे की जानकारी थी
इस बीच, ईरान ने यूएई को धमकी भरे अंदाज में चेतावनी दी और कहा कि उसे नेतन्याहू की कथित अबू धाबी यात्रा की जानकारी थी.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर लिखा, 'नेतन्याहू ने अब सार्वजनिक रूप से वही बात स्वीकार की है, जिसकी जानकारी ईरान की सुरक्षा एजेंसियां काफी पहले ही हमारे नेतृत्व को दे चुकी थीं.' हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अगर ईरान के पास यह जानकारी थी तो उसने इसे पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया.
अरागची ने आगे लिखा, 'ईरान की महान जनता से दुश्मनी मोल लेना मूर्खता है और यह जुआ खेलने जैसा है. इजरायल के साथ मिलकर हमारे खिलाफ काम करना माफ नहीं किया जा सकता.'
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'जो लोग इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में विभाजन पैदा कर रहे हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा.'
अगर यह यात्रा सच में हुई है तो 2020 के अब्राहम समझौतों के बाद नेतन्याहू की यूएई की यह पहली यात्रा थी.