मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद हालात पूर्ण युद्ध जैसे हो गए हैं. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के खातम ओल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने दावा किया है कि ईरानी सशस्त्र बलों ने 14 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है और इन हमलों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं.
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों के हमले आगे और अधिक घातक होंगे. यह बयान सरकारी मीडिया के हवाले से जारी किया गया है. आईआरजीसी के प्रवक्ता इब्राहीम जोल्फाघरी ने सरकारी टीवी पर बयान पढ़ते हुए कहा कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने 14 ठिकानों को निशाना बनाया है और इन हमलों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं.
ईरान में एक साथ 30 ठिकानों पर हमले
शनिवार को अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने तेल अवीव के साथ-साथ कुवैत, यूएई, कतर और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. दुबई और अबू धाबी में भी विस्फोटों की आवाज सुनी गई. अबू धाबी में एयर डिफेंस सिस्टम की ओर से ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने के बाद गिरे मलबे की चपेट में आने से एक एशियाई नागरिक की मौत हो गई.
ईरान में एक साथ 30 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें ईरानी राष्ट्रपति का आवास, सुप्रीम लीडर का ऑफिस और कई प्रमुख सरकारी दफ्तर शामिल हैं. हालांकि ईरान ने कहा है कि अयातुल्ला खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है.
'हथियार डाल दो या मौत का सामना करो'
अमेरिका ने अपने हमलों को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है. इन हमलों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा था, जो अमेरिका और अन्य देशों के लिए खतरा बन सकती थीं. ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा, 'हथियार डाल दो या मौत का सामना करो.'
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह हमला ईरान से पैदा हो रहे बड़े खतरे को खत्म करने के लिए किया गया है. ताजा हमले ऐसे समय में हुए हैं जब कुछ महीने पहले ही अमेरिका ने ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमला किया था, जबकि पिछले साल जून में इजरायली लड़ाकू विमानों ने देशभर में दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया था.