ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों और सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट बड़ी जंग के मुहाने पर खड़ा है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल सहित मध्य-पूर्व के कई देशों में स्थित यूएस मिलिट्री बेस को टार्गेट करते हुए मिसाइलें दागी हैं, इसमें सऊदी अरब भी शामिल है. ईरान ने खाड़ी के करीब हर उस देश पर मिसाइल दागी गई, जहां अमेरिका के बेस हैं.
इन खबरों के बीच पाकिस्तान की चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह सऊदी की मदद करने के लिए आगे आएगा? क्या आसिम मुनीर की सेना ईरान पर अटैक करेगी?
ईरानी हमलों के बाद ग्लोबल स्तर पर यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के एक समझौता हुआ था.
सऊदी-पाक के बीच क्या समझौता हुआ था?
पिछले साल सितंबर में सऊदी अरब और न्यूक्लियर हथियारों से लैस पाकिस्तान के बीच 'स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफ़ेंस एग्रीमेंट' हुआ था. एग्रीमेंट में किसी भी देश का नाम लिए बिना कहा गया था, "किसी भी देश के ख़िलाफ़ कोई भी हमला दोनों के ख़िलाफ़ हमला माना जाएगा."
NATO-स्टाइल डिफेंस पैक्ट और 'एक पर हमला = दोनों पर हमला' शब्दों को इस्लामाबाद में एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत के तौर पर देखा गया. पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों से इनफॉर्मल डिफेंस रिश्ते रहे हैं, लेकिन यह नया पैक्ट इस्लामिक देशों के बीच सिक्योरिटी कोऑपरेशन को फॉर्मल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान आगे आएगा?
इस बीच गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान खुद पड़ोसी मुल्क अफगानिस्ता के साथ जंग के मुहाने पर खड़ा है. पिछले दिनों दोनों ने एक-दूसरे पर कई दौर के हमले किए हैं.
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कौन है सऊदी अरब का दुश्मन?
सऊदी अरब के दो बड़े दुश्मन ईरान और इज़रायल हैं. सऊदी अपनी सुरक्षा के लिए वह अभी भी काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है. ग्लोबल फायरपावर डेटाबेस के मुताबिक 145 देशों की लिस्ट में सऊदी अरब 24वें स्थान पर है, जबकि उसका सहयोगी पाकिस्तान 12वें नंबर पर है. वहीं अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य ताकत है.