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क्या है ईरान की तेज और घातक Mosquito फ्लीट? जिसने होर्मुज में US Navy की नाक में किया दम 

अमेरिकी नाकेबंदी के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के आईआरजीसी ने अपने मॉस्किटो फ्लीट की तैनात की है. इस फ्लीट की छोटी और तेज नौकाएं, मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम हैं, जो इस अहम समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही के लिए चुनौती बनी हुई हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. (Photo: X/@IRNA)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. (Photo: X/@IRNA)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी के बीच, ईरान अपनी छोटी और तेज हमलावर नौकाओं के दम पर ताकत दिखा रहा है. इन्हें 'मॉस्किटो फ्लीट' (Mosquito Fleet) कहा जाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों में ईरान के बड़े युद्धपोतों को भारी नुकसान हुआ है. ईरान के कई युद्धपोत फारस की खाड़ी के तट पर स्थित उसके नौसैनिक ठिकानों पर क्षतिग्रस्त या डूबे पड़े हैं.

इसके बावजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना का एक 'शैडो फ्लीट' अब भी होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोतों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. आईआरजीसी नेवी की इस फ्लीट में तेज गति से चलने वाली छोटी नौकाएं शामिल हैं, जो ‘हिट-एंड-रन’ की रणनीति पर काम करती हैं. ईरान इन नौकाओं और समुद्र तट पर बने गुप्त ठिकानों से मिसाइलें और ड्रोन हमले कर रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं.

ईरान ने पहले लेबनान में संघर्ष विराम तक इस अहम समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी, हालांकि बाद में उसके बयान बदलते रहे. अब आईआरजीसी ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उसके नियंत्रण में है और यहां से ईरान की अनुमति के बिना जहाजों की आवाजाही संभव नहीं है. आईआरजीसी की नौसेना ईरान की नियमित नौसेना से अलग काम करती है और गुरिल्ला स्टाइल की युद्ध रणनीति अपनाती है. आईआरजीसी की नौसेना छोटी, तेज गति से चलने वाली और मुश्किल से पकड़ में आने वाली अपनी नौकाओं के जरिए दुश्मन के टारगेट पर अचानक हमले करती है.

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ईरान की नौसेना को पहुंचा है भारी नुकसान

ईरान की नियमित नौसेना को इजरायल और अमेरिका के हमलों में भारी नुकसान के बावजूद, आईआरजीसी की नौसेना के पास अब भी सैकड़ों से लेकर हजारों तक छोटी नौकाओं का बड़ा फ्लीट मौजूद है. आईआरजीसी की ये मॉस्किटो फ्लीट समुद्र तट पर बने गुप्त भूमिगम ठिकानों में छिपी रहती है. जरूरत पड़ने पर इन्हें तेजी से समुद्र में तैनात किया जा सकता है. ईरान ने यह रणनीति इराक युद्ध के दौरान सीखे गए सबक से अपनाई है. 

ईरान को जब लगा कि वह अमेरिका की नौसैनिक ताकत का सीधा मुकाबला नहीं कर सकता, तो उसने मॉस्किटो फ्लीट को इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई. आईआरजीसी की नौसेना में करीब 50,000 जवान हैं और फारस की खाड़ी में सक्रिय हैं. आईआरजीसी ने शुरुआत में साधारण नौकाओं को मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर से लैस किया था, लेकिन अब उसने अपनी क्षमताएं बढ़ा ली हैं. उसके पास हाई-स्पीड फ्रिगेट, मिनी सबमरीन और समुद्री ड्रोन भी हैं. उसकी कुछ नौकाएं 100 नॉट्स (185.2 किमी) से अधिक की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं, जिससे वे तेजी से हमला कर बच निकलने में सक्षम होती हैं.

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हालांकि अमेरिकी युद्धपोत इन खतरों से निपटने के लिए आधुनिक हथियारों से लैस हैं, लेकिन कमर्शियल जहाज इस तरह के खतरे से निपटने के लिए जरूरी हथियारों और तकनीक से लैस नहीं होते हैं. अमेरिकी नौसेना गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर में तैनात है और होर्मुज से ईरानी जहाजों को नहीं गुजरने दे रही है. वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखी, तो वह अपने अभियान को लाल सागर जैसे अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक भी बढ़ा सकता है.

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