पाकिस्तान ने ईरान में चल रहे अमेरिका और इजरायल के हमलों के खिलाफ कई बार ईरान के प्रति एकजुटता दिखाई है. पिछले हफ्ते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की थी. अब इस लगातार समर्थन के लिए ईरान ने पाकिस्तान का धन्यवाद दिया है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोमवार को 'अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता के बीच पाकिस्तान सरकार और वहां के लोगों के अटूट समर्थन' के लिए आभार जताया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उर्दू में किए गए एक पोस्ट में अरागची ने लिखा, 'इस मुबारक और पवित्र दिन (सब-ए-कद्र) पर मैं अमेरिका और इजरायली शासन की आक्रामकता के सामने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ पाकिस्तान सरकार और वहां के लोगों की एकजुटता के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूं.'
उन्होंने आगे कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि ईरान पूरी तरह अल्लाह तआला पर भरोसा रखते हुए अपनी रक्षा करेगा. उन्होंने बाहरी खतरों के सामने मजबूती और धैर्य बनाए रखने का आह्वान भी किया.
युद्ध ने पूरी दुनिया पर डाला है असर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी और इजरायली बलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरे का हवाला देते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए.
इसके बाद यह युद्ध तेजी से व्यापक संघर्ष में बदल गया, जिसमें ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए हैं.
इस युद्ध ने प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट पैदा कर दी है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है. इससे लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय संघर्ष और उसके दूरगामी आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
युद्ध का असर वैश्विक बाजारों और परिवहन नेटवर्क पर भी गंभीर रूप से पड़ा है. तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. वहीं मध्य-पूर्व में दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख हवाई केंद्रों पर पाबंदियों के कारण हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है.
सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ऊर्जा सुरक्षा, विमानन और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले संभावित व्यापक प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है. वहीं ईरान का कहना है कि जब तक जरूरी होगा, वो अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
एक तरफ ईरान को समर्थन, दूसरी तरफ सऊदी को सुरक्षा का वादा
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने ईरान के प्रति समर्थन वाला रुख अपनाया है. उसने संयम और संवाद की अपील की है, लेकिन सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है.
एक तरफ पाकिस्तान ईरान को समर्थन दे रहा है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब के साथ भी खड़ा दिख रहा है. पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया था जिसमें तय हुआ था कि दोनों में से किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा.
युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान ने अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए उसके सहयोगी सऊदी पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. इन हमलों में पाकिस्तान ने समर्थन जताने के अलावा कुछ नहीं किया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ युद्ध के बीच सऊदी अरब जाकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिले भी थे. इस दौरान पाकिस्तान ने संदेश दिया कि हर जरूरत की घड़ी में पाकिस्तान सऊदी की सुरक्षा के लिए खड़ा है.