अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल खरीद रोक दी है जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता हो पाया है. लेकिन ट्रंप के इस दावे के उलट, भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकी नहीं बल्कि अब भी भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल खरीद रही हैं. हालांकि, रूसी तेल की खरीद में कमी जरूर आई है जिसकी वजह से रूस पर अपने तेल को अन्य एशियाई देशों में खपाने का दबाव बढ़ गया है.
ब्लूमबर्ग ने शुक्रवार को रिपोर्ट किया कि भारत ने रूस से रियायती तेल की खरीद घटा दी है जिसके बाद रूस अपने तेल को लेकर दबाव में है. रूस अपने तेल के लिए अन्य एशियाई खरीदार ढूंढ रहा है. इसके चलते एक दर्जन से ज्यादा टैंकर समुद्र में चल रहे हैं. रूस उनके लिए कोई खरीददार नहीं ढूंढ पा रहा है.
ग्लोबल शिपिंग-इंटेलिजेंस फर्म केपलर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 12 टैंकर हिंद महासागर में और मलेशिया, चीन और पूर्वी रूस के तटों के पास से गुजर रहे हैं. इन टैंकरों में रूस के प्रमुख कच्चे तेल ग्रेड यूराल्स के करीब 1.2 करोड़ बैरल लदे हैं.
रूसी तेल के शीर्ष खरीदारों में शामिल है भारत
2022 में यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. रूसी तेल भी प्रतिबंध के दायरे में आया और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गईं. प्रतिबंधों के बीच रूस ने भारत, चीन जैसे अपने एशियाई सहयोगियों को रियायती दरों पर कच्चा तेल ऑफर किया. इसके बाद भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हो गया था.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जनवरी में भारत में रूसी तेल का आयात औसतन करीब 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा. 2024 के मध्य में भारत रूस से एक दिन में 20 लाख बैरल तेल खरीद रहा था.
ट्रंप ने किया रूसी तेल की खरीद रोकने का दावा लेकिन क्या भारत ने रोकी खरीद?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सोमवार को कहा था कि टैरिफ कम करने के समझौते के तहत भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा.
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, 'भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका, वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति जताई है. इससे यूक्रेन में युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी.'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार समझौते की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कच्चे तेल आयात पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की. रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने रूसी तेल की खरीद के संबंध में कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश नहीं जारी किया है. हालांकि, इस बीच कुछ भारतीय रिफाइनर नए ऑर्डर टाल रहे हैं.
अब रूस अपने तेल का क्या करेगा?
समुद्र में यहां-वहां भटकते रूसी तेल टैंकरों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि रूस अपने अतिरिक्त यूराल ग्रेड तेल का क्या करेगा. चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियों ने जनवरी में यूराल्स की खरीद बढ़ाकर करीब पांच लाख बैरल प्रति दिन कर दी, जो अब तक का रिकॉर्ड है. हालांकि, ये रिफाइनरियां आम तौर पर हल्के ग्रेड जैसे ESPO और सोकोल को प्राथमिकता देती हैं, जिन्हें रूस के प्रशांत बंदरगाहों से भेजा जाता है.
इंडोनेशिया जैसे कुछ एशियाई देशों भी कभी-कभार रूसी तेल खरीदते हैं लेकिन वो भी हल्के ग्रेड पसंद करते हैं. इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में फिलहाल तेल की आपूर्ति काफी ज्यादा है जिसके चलते रूस के लिए वैकल्पिक खरीदार ढूंढना और मुश्किल हो रहा है.
जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि यूराल्स कच्चे तेल से भरे और भी टैंकर अटलांटिक महासागर, भूमध्य सागर और लाल सागर से एशिया की ओर बढ़ रहे हैं. इनमें से कई जहाज अपना डेस्टिनेशन सिंगापुर बता रहे हैं लेकिन मांग के आधार पर उनके डेस्टिनेशन बदल सकते हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि भारत तेल खरीद को लेकर अपनी स्ट्रैटेजी बदल रहा है जिससे बिना किसी तय डेस्टिनेशन वाले रूसी टैंकरों की संख्या भी बढ़ी है.
समंदर में बढ़ रही लावारिस तेल टैंकरों की संख्या, चीन की भी ना
पिछले एक साल में दुनिया भर में तेल टैंकरों और अन्य कमर्शियल जहाजों को समंदर में ही लावारिस छोड़े जाने के मामले तेजी से बढ़े हैं. इनमें बड़ी संख्या में रूसी जहाज भी हैं.
रूस से चीन के लिए रवाना हुआ एक तेल टैंकर भी लंबे समय से समंदर में पड़ा है. जहाज पर मौजूद एक सीनियर डेक अधिकारी इवान (बदला हुआ नाम) ने पिछले महीने ब्रिटेन के ब्रॉडकास्टर बीबीसी से बात की थी.
उन्होंने कहा था, 'हमारे पास मीट, अनाज, मछली, जीने के लिए जरूरी बुनियादी चीजों की भारी कमी हो गई थी. इसका हमारी सेहत और कामकाज के माहौल पर असर पड़ा. क्रू भूखा था, क्रू गुस्से में था, और हम बस हर रोज किसी तरह जिंदा रहने की कोशिश कर रहे थे.'
इवान जिस जहाज पर मौजूद हैं, उस पर लगभग 7.5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लदा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ डॉलर है. यह जहाज नवंबर की शुरुआत में रूस के सुदूर पूर्व से चीन के लिए रवाना हुआ था.
यह जहाज अब भी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में है. इसके आसपास निगरानी का स्तर इतना ज्यादा है कि चीन इसे अपने बंदरगाह में प्रवेश की इजाजत देने को तैयार नहीं है.
दिसंबर में वैश्विक ट्रेड यूनियन संगठन इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) ने इस जहाज को परित्यक्त घोषित किया, जब क्रू ने बताया कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला था.
हालांकि, आईटीएफ ने हस्तक्षेप करते हुए इवान और उनके साथियों का दिसंबर तक का बकाया वेतन दिलवाया है और जहाज पर भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की व्यवस्था की है. कुछ क्रू सदस्यों को उनके देश वापस भेज दिया गया है, लेकिन इवान जैसे कई लोग अब भी जहाज पर ही फंसे हुए हैं.