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भारत-कनाडा रिश्तों में 'पॉवर' रीसेट, मंत्री हॉजसन बोले- हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं

भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक सुधारों के बाद ऊर्जा साझेदारी एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है. कनाडा के ऊर्जा मंत्री के अनुसार, यूरेनियम, LNG और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग अब केवल विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है.

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कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन (Photo-ITG)
कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन (Photo-ITG)

भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ समय से जारी तनाव अब खत्म होता दिख रहा है. कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया है. 

इंडिया एनर्जी वीक में शामिल होने आए हॉजसन ने कहा कि अब दोनों देशों के रिश्ते 'संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति आपसी सम्मान' पर टिके हैं. उन्होंने कहा है कि भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी अब विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है.

India Today Global को दिए विशेष साक्षात्कार में हॉजसन ने कहा कि दोनों देशों ने बीते तनावों के बाद रिश्तों को “रीसेट” किया है और अब यह साझेदारी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आपसी सम्मान पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा मिलकर सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी ऊर्जा भविष्य गढ़ सकते हैं.

भारत को बताया परफेक्ट मैच

हॉजसन ने कहा कि भारत और कनाडा एक-दूसरे के लिए “परफेक्ट मैच” हैं. जहां कनाडा स्वच्छ और पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में मजबूत है, वहीं भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला देश है.

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उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा मांग की लगभग एक-तिहाई वृद्धि भारत से आएगी, जो कनाडा के लिए बड़ा अवसर है. दोनों देश LNG, LPG, कच्चा तेल, यूरेनियम, पोटाश और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हैं.

हॉजसन ने कहा कि कनाडा भारत को सीधे पश्चिमी तट से ऊर्जा निर्यात करने के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहा है, जिससे शिपिंग लागत और समय दोनों कम होंगे. परमाणु ऊर्जा पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि IAEA नियमों का पालन करने वाली भारतीय इकाइयों को कनाडा शांतिपूर्ण उपयोग के लिए यूरेनियम आपूर्ति को तैयार है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल में, जहां कुछ देश व्यापार और सप्लाई चेन को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, भारत और कनाडा जैसे देशों को विविध और भरोसेमंद साझेदारियों को मज़बूत करना होगा. 

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