ईरान में चल रही अमेरिका और इजरायल की जंग के बीच महीनों से भारत के समंदर के पास भटक रहे रूसी तेल जहाजों को अपना खरीददार मिल गया है. जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जिन दो रूसी तेल कार्गो जहाजों ने पहले पूर्वी एशिया को अपना डेस्टिनेशन बताया था, उन्होंने अब भारत का रुख कर लिया है. इससे संकेत मिलता है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत रूस के कच्चे तेल की खरीद फिर से बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है.
तेल टैंकरों पर नजर रखने वाले Kpler और Vortexa के आंकड़ों के अनुसार, रूसी कच्चे तेल 'यूराल' ग्रेड के करीब 14 लाख बैरल कच्चे तेल को ले जा रहे दो टैंकर इस हफ्ते भारतीय बंदरगाहों पर तेल उतारने वाले हैं. इससे पहले इन जहाजों ने संकेत दिया था कि वो और आगे पूर्वी एशिया की ओर जा रहे हैं.
यूराल तेल बाल्टिक और ब्लैक सी से लोड होता है और भारत की रिफाइनरियां अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने से पहले भारी मात्रा में इनकी खरीदारी करती थीं. लेकिन अमेरिका के दबाव के भारत के यूराल तेल खरीद में तेजी से गिरावट आई है.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 730,000 बैरल तेल ले जा रहा सूएजमैक्स टैंकर ‘ओड्यून’ बुधवार को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंच गया. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि उसने तेल उतारा है या नहीं. वहीं, 700,000 से ज्यादा बैरल तेल ले जा रहा अफ्रामैक्स टैंकर ‘मतारी’ गुरुवार को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचने वाला है.
हाल के हफ्तों में भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी, जिससे रूस को चीन में खरीदार तलाशने पड़े. लेकिन मध्य-पूर्व में युद्ध और ईरान के होर्मुज की खाड़ी के बंद करने के बाद से कच्चे तेल की कमी की आशंका बढ़ गई है. ऐसे में भारत के रिफाइनर एक बार फिर रूसी तेल की ओर रुख करते दिखाई दे रहे हैं.
अपना डेस्टिनेशन फिर बदल सकते हैं रूसी तेल के जहाज
रिपोर्ट के मुताबिक, डेस्टिनेशन में और बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं. जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अरब सागर में मौजूद सूएजमैक्स टैंकर ‘इंड्री’ पहले अपना डेस्टिनेशन सिंगापुर दिखा रहा था. जहाज में 730,000 बैरल यूराल तेल लदा था और इस हफ्ते अचानक जहाज उत्तर की ओर मुड़ गया और भारत की तरफ बढ़ गया.
पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इन तीनों जहाजों-‘ओड्यून’, ‘मतारी’ और ‘इंड्री' को अपनी प्रतिबंधित जहाजों की लिस्ट में शामिल किया था.
भारत की रिफाइनरियों को जल्द मिलेगी राहत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी खबर दी है कि मध्य-पूर्व में जंग की वजह से तेल सप्लाई में रुकावट आ रही है. ऐसी स्थिति में रूस भारत को तेल भेजने के लिए तैयार है. इस मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले एक इंडस्ट्री सोर्स ने रॉयटर्स को बताया कि करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल ऐसे जहाजों में है जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास हैं और कुछ ही हफ्तों में भारत पहुंच सकते हैं.
सूत्र ने यह बताने से इनकार कर दिया कि गैर-रूसी बेड़े के ये कार्गो मूल रूप से कहां जाने वाले थे, लेकिन उसने कहा कि वे कुछ हफ्तों के भीतर भारत को तेल पहुंचा सकते हैं, जिससे रिफाइनरियों को जल्दी राहत मिल सकती है.
भारत दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार और उपभोक्ता है जो कि सप्लाई में झटकों को लेकर संवेदनशील है. भारत के पास कच्चे तेल का भंडार केवल लगभग 25 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है. वहीं, भारतीय रिफाइनरियों के पास भी डीजल, पेट्रोल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का सीमित भंडार है.
भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा कि मध्य-पूर्व में संघर्ष 10- 15 दिनों से आगे बढ़ने की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति के स्रोत तलाशे जा रहे हैं.