बांग्लादेश में भारत के नामित उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने हाल ही में कहा था कि भारत और बांग्लादेश 'अलग-अलग रहकर शक्तिशाली नहीं हो सकते'. उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश आकर उन्हें नहीं लगता कि वो किसी दूसरे देश में आए हैं. उनके इस बयान से बांग्लादेश में विवाद काफी बढ़ गया है. बांग्लादेश की कट्टर इस्लामिक पार्टी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (JeI) के अमीर शफीकुर रहमान ने शनिवार को दिनेश त्रिवेदी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि उनका बयान 'निश्चित रूप से निंदनीय' है.
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में शफीकुर रहमान ने कहा कि भारत और बांग्लादेश दोनों स्वतंत्र देश हैं और तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार को दिनेश त्रिवेदी से उनके बयान का स्पष्टीकरण मांगना चाहिए.
उन्होंने कहा, 'कल बांग्लादेश में नए भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के आने के बाद उनका एक बयान हमारे संज्ञान में आया. हमारा मानना है कि सरकार को उनसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि- भारत और बांग्लादेश के एक हो जाने, से उनका क्या आशय था.'
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दरअसल, दिनेश त्रिवेदी पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल-बेनापोल भूमि सीमा मार्ग से बांग्लादेश पहुंचे थे. कोलकाता से करीब 112 किलोमीटर दूर इस सीमा पार करने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश में प्रवेश करने पर उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वे किसी दूसरे देश में आए हैं.
उन्होंने कहा, 'भारत की आबादी 140 करोड़ है और बांग्लादेश की 20 करोड़. जो भी काम हमें करना है, वो मिलकर करना होगा. हम अलग-अलग रहकर शक्तिशाली नहीं बन सकते.'
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शफीकुर रहमान ने कहा, 'इस मुद्दे को स्पष्ट किया जाना चाहिए. जिस तरह भारत एक स्वतंत्र देश है, उसी तरह बांग्लादेश भी एक स्वतंत्र देश है. अगर उनके बयान का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो इससे जनता के बीच भ्रम पैदा होगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर उनका आशय वास्तव में शाब्दिक अर्थ में इसी प्रकार का था, तो यह निश्चित रूप से निंदनीय है.'
1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद दिनेश त्रिवेदी इस पद पर नियुक्त किए गए पहले ऐसे भारतीय उच्चायुक्त हैं, जो पेशेवर राजनयिक नहीं बल्कि राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं. इससे पहले ढाका में भारत के लगभग सभी उच्चायुक्त करियर डिप्लोमैट यानी विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं.
सिर्फ पहले भारतीय उच्चायुक्त सुबिमल दत्त इसका अपवाद थे. वे 1962 में सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन बाद में उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए दोबारा बुलाया गया था. इसलिए, उनके बाद अब दिनेश त्रिवेदी पहले राजनीतिक नियुक्ति वाले भारतीय उच्चायुक्त बने हैं.
भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक जमात-ए-इस्लामी की इस प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
फरवरी 2026 के चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 300 में से 212 सीटें जीती थीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को 77 सीटें मिली थीं. इनमें से अकेले जमात-ए-इस्लामी 68 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी.
जमात खुद की छवि बदलने की कोशिश में
पिछले कुछ महीनों में उन्होंने यूरोपीय संघ समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय समूहों के राजनयिकों से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि वे जमात-ए-इस्लामी की एक अधिक व्यावहारिक और नरम छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.
दरअसल, इस पार्टी पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान उसने पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया था और मानवता के खिलाफ अपराधों में उसका सहयोग रहा था. हालांकि, पार्टी इन आरोपों से इनकार करती रही है.
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शफीकुर रहमान के नेतृत्व वाली जमात-ए-इस्लामी ढाका की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरी है और उन्हें अक्सर विदेशी राजनयिकों के साथ बैठकों में देखा जाता है. 9 जून को उन्होंने अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन से राष्ट्रीय संसद भवन में मुलाकात की थी, जहां क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
पिछले साल भी शफीकुर रहमान ने उस समय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी, जब उन्होंने दावा किया था कि 2025 में हार्ट सर्जरी के बाद भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (R&AW) के एक अधिकारी ने उनसे मुलाकात की थी.