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असम: खुले में पेशाब करने वालों की अब सरेआम बेइज्जती! LED स्क्रीन पर दिखेगा वीडियो

असम के तिनसुकिया नगर बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने वालों को रोकने के लिए 'हॉल ऑफ शेम' अभियान शुरू किया है. इस पहल के तहत नियम तोड़ने वालों के वीडियो फुटेज को शहर की बड़े डिजिटल स्क्रीन पर दिखाया जाता है. इसका मकसद नागरिकों में स्वच्छता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना है.

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तिनसुकिया को साफ-सुथरा बनाने के लिए 'हॉल ऑफ शेम' अभियान चलाया जा रहा. (Photo- ITGD)
तिनसुकिया को साफ-सुथरा बनाने के लिए 'हॉल ऑफ शेम' अभियान चलाया जा रहा. (Photo- ITGD)

असम के तिनसुकिया शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्थानीय नगर बोर्ड ने एक अनोखी मुहिम शुरू की है. तिनसुकिया म्युनिसिपल बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने वालों को सबक सिखाने के लिए 'हॉल ऑफ शेम' अभियान की शुरुआत की है.

'हॉल ऑफ शेम' अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की हरकतें सड़क किनारे लगी बड़ी LED स्क्रीनों पर सरेआम दिखाई जा रही हैं. इस अभियान के लिए नगर बोर्ड ने पूरे शहर में जगह-जगह CCTV कैमरे लगाए हैं.

CCTV की मदद से उन लोगों की पहचान की जा रही है जो सड़कों या दीवारों के किनारे कचरा फेंकते हैं या खुले में पेशाब करते हैं. कैमरे में कैद हुई इन हरकतों के फुटेज को सीधे बड़े रास्तों पर लगी बड़ी डिजिटल स्क्रीनों पर दिखाया जा रहा है, ताकि सारी जनता उन्हें देख सके.

नागरिक जिम्मेदारी का अहसास कराना है मकसद

तिनसुकिया नगर निकाय के अधिकारियों का कहना है कि इस अनोखी पहल का असल मकसद लोगों में नागरिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है. प्रशासन का मानना है कि बार-बार समझाने और जुर्माना लगाने के बाद भी कई लोग स्वच्छता के नियमों का उल्लंघन करते रहते हैं. ऐसे में सार्वजनिक रूप से नाम और वीडियो सामने आने के डर से लोग खुले में गंदगी फैलाने से बचेंगे और स्वच्छता नियमों का पालन करेंगे.

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सोशल मीडिया और जनता के बीच छिड़ी बहस

प्रशासन की इस डिजिटल 'हॉल ऑफ शेम' मुहिम को लेकर शहर के लोगों और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं. अभियान का समर्थन करने वाले नागरिकों का कहना है कि शहर को साफ रखने के लिए ये एक बेहद नया और असरदार तरीका है.

दूसरी तरफ, कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह सरेआम किसी का वीडियो सड़क पर प्रदर्शित करना लोगों की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन है.

(इनपुट- अतीक हबीब)

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