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इमरान की पार्टी का इस्लामाबाद मार्च, खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी की आहट क्यों?

इमरान खान की पार्टी PTI के बीच बातचीत विफल होने के बाद इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू करने के बीच, खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने का विकल्प चर्चा में है, हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

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पीटीआई का इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च. (Image: Reuters)
पीटीआई का इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च. (Image: Reuters)

पाकिस्तान में एक तरफ इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) इस्लामाबाद की तरफ बढ़ रही है, दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा को लेकर केंद्र सरकार के विकल्पों पर चर्चा तेज है. PTI ने जेल में बंद इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लॉन्ग मार्च शुरू किया है. इसी बीच संघीय सरकार खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी या गवर्नर रूल लगाने के विकल्प पर विचार कर रही है, जहां PTI के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी का शासन है.  हालांकि, अभी ऐसा कोई फैसला हुआ नहीं है.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, मार्च की अगुवाई खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं. यह मार्च 4 अक्टूबर को लक्की मरवत से शुरू हुआ. PTI की मुख्य मांग इमरान खान की रिहाई है. सरकार और PTI के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी किसी समझौते तक नहीं पहुंच सका, जिसके बाद पार्टी ने मार्च आगे बढ़ाने का फैसला किया. 

मामला सिर्फ इमरान खान की रिहाई तक सीमित नहीं है. इस टकराव के बीच खैबर पख्तूनख्वा की सरकार और केंद्र के रिश्ते भी सवालों के घेरे में हैं. संघीय सरकार का आरोप है कि प्रांत में आतंकवाद से निपटने को लेकर PTI सरकार का रवैया उसके लिए चिंता का विषय है. PTI इन आरोपों को खारिज करती रही है.

इमरान की रिहाई के लिए सड़कों पर PTI

PTI के इस लॉन्ग मार्च का सबसे बड़ा मुद्दा इमरान खान की रिहाई है. पार्टी का कहना है कि उसके संस्थापक जेल में हैं और उनकी रिहाई को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा. लॉन्ग मार्च ऐसे वक्त शुरू हुआ है जब PTI और सरकार के बीच बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई. सरकार चाहती थी कि मार्च को वापस लिया जाए. PTI ठोस आश्वासन मांग रही थी.

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बातचीत में आतंकवाद का मुद्दा भी बड़ा रहा. सरकार ने PTI से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ साफ रुख अपनाने, सुरक्षा बलों के साथ सहयोग बढ़ाने समेत कई मुद्दों पर प्रतिबद्धता मांगी. PTI का कहना था कि केंद्र सरकार एकतरफा अधिकार चाहती है और ऐसे मामलों में प्रांत से भी सलाह होनी चाहिए.

गवर्नर ने इमरजेंसी पर क्या कहा?

लॉन्ग मार्च के बीच अब नजरें खैबर पख्तूनख्वा पर भी हैं. पाकिस्तान की संघीय सरकार यहां इमरजेंसी या गवर्नर रूल के विकल्प पर विचार कर रही है. खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने साफ कहा कि अगर प्रांत को बचाने के लिए इमरजेंसी लगाना जरूरी हुआ, तो इसे लगाया जा सकता है. यानी PTI के इस्लामाबाद मार्च के बीच प्रांत में केंद्र की ओर से बड़ा संवैधानिक कदम उठाने की संभावना पर चर्चा हो रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर हाउस की ओर से कहा गया कि अगर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री खैबर पख्तूनख्वा की स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी या गवर्नर रूल को जरूरी मानते हैं, तो गवर्नर अपनी संवैधानिक भूमिका निभाएंगे. यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब PTI इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लॉन्ग मार्च कर रही है.

पहले भी उठ चुका है गवर्नर रूल का मुद्दा

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खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल की चर्चा अचानक नहीं हुई है. इससे पहले भी पाकिस्तान सरकार के नेताओं की तरफ से इसका संकेत दिया जा चुका है. सितंबर में गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा था कि सरकार के पास कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं. बाद में संसद से जुड़े एक मंत्री ने भी कहा कि इमरजेंसी के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

अब PTI का लॉन्ग मार्च उसी राजनीतिक तनाव के बीच शुरू हुआ है. एक तरफ इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पार्टी समर्थक इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ केंद्र सरकार खैबर पख्तूनख्वा को लेकर सख्त कदम उठाने के विकल्प पर विचार कर रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति में टकराव और बढ़ सकता है.

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