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'भारतीय जहाजों से नहीं वसूला पैसा, अपनी सरकार से पूछ लें', होर्मुज टोल पर ईरान की सफाई

ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि भारतीय जहाजों से होर्मुज टोल के नाम पर कोई पैसा नहीं लिया गया. उन्होंने भारत-ईरान रिश्तों को मजबूत बताते हुए अमेरिका पर बातचीत विफल करने का आरोप लगाया. इस बयान से वैश्विक ऊर्जा और कूटनीति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं.

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ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने टोल की बात को झूठा बताते हुए भारत को भरोसेमंद साझेदार कहा है. (File Photo: ITG)
ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने टोल की बात को झूठा बताते हुए भारत को भरोसेमंद साझेदार कहा है. (File Photo: ITG)

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी वैश्विक तनाव अपने उफान पर है. इस बीच ईरान ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भारतीय जहाजों से इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए टोल वसूला गया. दिल्ली में ईरानी दूतावास में राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार बताया है.

ईरानी राजदूत ने कहा, "आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने कोई शुल्क लिया है." उनके इस बयान को उन तमाम अटकलों पर सीधा जवाब माना जा रहा है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भुगतान किया है. इस दौरान 9 LPG और ऑयल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से भारत आए हैं.

भारत पहले ही पैसे लेने के दावों को खारिज कर चुका है और अब ईरान ने भी इसे पूरी तरह निराधार बता दिया है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, शांति वार्ता विफल के बाद फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले करीब 15 जहाज अब भी फंसे हुए हैं. ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है.

ईरानी राजदूत ने इस पूरे विवाद के बीच भारत के साथ संबंधों को खास तौर पर रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि कठिन हालात के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं. उन्होंने कहा, "हमारे संबंध अच्छे हैं. हम मानते हैं कि ईरान और भारत के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. भारत हमारे मित्र देशों के समूह में शामिल है.'' 

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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा गलियारों में से एक है. भारत के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है, क्योंकि देश के कच्चे तेल और LPG आयात का करीब आधा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या अवरोध सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ हुई बातचीत के विफल रहने के लिए भी वॉशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया. मो. फथाली ने कहा कि बातचीत अमेरिकी पक्ष की गैर-कानूनी मांगों की वजह से आगे नहीं बढ़ सकी. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी शर्तों में नरमी दिखाता है, तो बातचीत की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी की चेतावनी ने हालात को ज्यादा गंभीर बना दिया है. इस मो. फथाली ने कहा कि अमेरिका ईरान की क्षमताओं से पूरी तरह वाकिफ है. उन्होंने दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान के क्षेत्रीय नियंत्रण में आता है, जो इस विवाद की जड़ में मौजूद सबसे बड़ा मुद्दा है.

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