मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की चेतावनी के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने साफ कहा है कि भारत के साथ ईरान के "अच्छे संबंध" हैं और भारतीय जहाजों को इस अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा. यानी ईरानी दूत ने भरोसा दिया है कि भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में कोई परेशानी नहीं होगी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित किया है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस सप्लाई गुजरती है. भारत के लिए यह और भी अहम है क्योंकि उसकी करीब 40% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से आती है.
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युद्ध और तनाव के चलते इस रूट पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. लेकिन ईरान का यह आश्वासन भारत के लिए एक सेफ्टी कुशन की तरह है. इससे संकेत मिलता है कि भले ही वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़े, लेकिन भारत के साथ ईरान अपने रिश्तों को संतुलित रखना चाहता है.
दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी थी, जिससे भारत जैसे देश फिर से ईरान से तेल खरीदने लगे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सात साल बाद इस हफ्ते ईरान से कच्चे तेल की पहली खेप भी हासिल करने जा रहा है. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना भारत के लिए बेहद जरूरी हो जाता है.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया था कि अमेरिका इस स्ट्रेट को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू करेगा. उनका कहना था कि जो भी जहाज ईरान को "टोल” देगा, उसे रोका जाएगा. हालांकि बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि यह ब्लॉकेड सिर्फ उन जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं, जबकि अन्य देशों के जहाजों को गुजरने दिया जाएगा.
इसके बावजूद, इस पूरी घटना ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों ने वैकल्पिक सप्लाई चेन पर काम शुरू कर दिया है.
ईरान ने भी अमेरिका के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इसे "गैरकानूनी" और "समुद्री डकैती" जैसा बताया है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर उनके हितों को नुकसान पहुंचा, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी देश का पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा.