ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपना रणनीतिक शिकंजा कस लिया है. सीजफायर के बावजूद तेहरान जहाजों को निशाना बना रहा है और ग्लोबल मार्केट्स पर दबाव डालने के लिए इस जलमार्ग को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है. NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वक्त में यहां ट्रैफिक करीब पूरी तरह ठप हो गया है. जंग से पहले रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब कुछ दिनों में सिर्फ एक जहाज ही पास हो पा रहा है.
हालांकि, जंग शुरू होने के बाद से ईरान से जुड़े 300 से ज्यादा जहाज सुरक्षित गुजरे हैं. हमलों के डर से कई जहाजों ने बीच रास्ते से ही वापस मुड़ना शुरू कर दिया है, जिससे सुरक्षित आवाजाही का भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है.
जानकारों का कहना है कि अब यहां 'शिपिंग की कोई आजादी' नहीं बची है और जहाजों को पार होने के लिए ईरान की अनुमति की जरूरी होती है.
ग्लोबल एनर्जी पर असर
होर्मुज स्ट्रेट ग्लोबल ऑयल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा कैरी करता है. इस आपूर्ति में आए व्यवधान की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 10 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. इस बीच दुनिया भर में ईंधन, गैस और ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है. शिपिंग कंपनियां अपनी सेवाओं को फिर से शुरू करने से कतरा रही हैं, क्योंकि बिना चेतावनी के होने वाले हमले स्थिति को खतरनाक बना रहे हैं.
अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को काटने के लिए नाकेबंदी लागू की है. हालांकि यूएस का दावा है कि कोई भी ईरानी जहाज सीमा पार नहीं कर पाया, लेकिन जानकारों का मानना है कि कुछ जहाज अब भी निकलने में सफल रहे हैं. मौजूदा वक्त में समुद्र में अमेरिका की उपस्थिति सीमित है और जहाजों की सुरक्षा के लिए कोई बड़े पैमाने पर नौसैनिक एस्कॉर्ट सिस्टम मौजूद नहीं है.
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होर्मुज पर कंट्रोल ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में बड़ी सौदेबाजी की ताकत बख्शी है. हमलों का सामना करने के बावजूद, तेहरान ग्लोबल ट्रेड को बाधित करने की अपनी क्षमता को बनाए रखने में सफल रहा है. जहाजों को मुख्य लेन के बजाय ईरानी जलक्षेत्र के करीब से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे ईरान की पकड़ और मजबूत हो गई है.