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ईरान युद्ध पर ग्रैंड अयातुल्ला सिस्तानी का फतवा जारी, कहा- मस्जिदों और सड़कों पर एकजुट रहें

ग्रैंड अयातुल्ला सिस्तानी ने ईरान में जारी दंगों और बाहरी साजिशों के खिलाफ फतवा जारी किया है. उन्होंने समाज के हर वर्ग से एकजुट होकर दंगाइयों और राजद्रोहियों का मुकाबला करने की अपील की है. सिस्तानी ने कहा कि देश की सुरक्षा और इस्लामी व्यवस्था की रक्षा के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी जरूरी है.

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अयातुल्ला सिस्तानी ने ईरान के हालात पर चिंता जताई. (File Photo: Reuters)
अयातुल्ला सिस्तानी ने ईरान के हालात पर चिंता जताई. (File Photo: Reuters)

दुनिया के सबसे प्रभावशाली शिया मौलानाओं में से एक ग्रैंड अयातुल्ला सिस्तानी ने ईरान युद्ध पर फतवा जारी किया है. इराक में रहने वाले सिस्तानी ने अपने फतवे में ईरान के मौजूदा हालात को 'बेहद संवेदनशील' बताया है. उन्होंने समाज के हर वर्ग से एकजुट होने और दंगाइयों के राजद्रोह का डटकर मुकाबला करने की अपील की है.

अयातुल्ला सिस्तानी ने अपने संदेश में दंगाइयों और बाहरी दुश्मनों की उन कोशिशों को उजागर किया है, जो देश की शांति भंग करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लोगों के बीच निराशा पैदा करने, धार्मिक विश्वासों को कमजोर करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.

सिस्तानी ने हत्या, लूटपाट, सार्वजनिक संपत्ति को तबाह करने और अराजकता फैलाने जैसी हिंसक गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. बता दें कि इससे पहले उन्होंने जून 2014 में भी ISIS के खिलाफ भी ऐसा ही फतवा जारी किया था. उन्होंने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ इराकियों से हथियार उठाने की अपील की थी.

ईरान को बांटने की साजिश पर चेतावनी

मौलाना ने अपने फतवे में दुश्मनों की उन साजिशों का जिक्र किया है, जिनका मकसद ईरान को बांटना और इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेंकना है. उन्होंने इसे रोकने के लिए जनता की ज्यादा से ज्यादा मौजूदगी को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया है.

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'मस्जिदों और सड़कों पर मौजूदगी जरूरी'

अयातुल्ला सिस्तानी ने कहा, 'मैं मस्जिदों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अपनी राय देने और इस्लाम और क्रांति के आदर्शों का समर्थन करने, दुश्मनों को निराश करने, उनके दिलों में डर पैदा करने और इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मौजूद होना अपना फर्ज समझता हूं.'

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राजद्रोह का सामना करना बहुत जरूरी!

ग्रैंड अयातुल्ला सिस्तानी के मुताबिक, आज की नाजुक स्थिति में दंगों और बुराई को रोकने के लिए समाज के बीच मौजूद रहना एक नेक और जरूरी काम है. धार्मिक नियमों के मुताबिक, कोशिश यही होनी चाहिए कि माता-पिता की मर्जी ली जाए और उन्हें कोई दुख न पहुंचे. लेकिन अगर देश और समाज की सुरक्षा के लिए राजद्रोह का सामना करना बहुत जरूरी हो जाए, तो ऐसी स्थिति में बाहर निकलकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाएगा.

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