इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी सरकार को आगामी राष्ट्रीय चुनावों से ठीक एक साल पहले जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है. इटली के मतदाताओं ने सरकार द्वारा प्रस्तावित व्यापक न्यायिक सुधारों के खिलाफ मतदान किया है, जिसे मेलोनी की लीडरशिप के लिए एक बड़ी हार माना जा रहा है.
इटली के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार के खिलाफ 'No' के पक्ष में लगभग 54 प्रतिशत वोट पड़े, जबकि सुधारों के समर्थन में 'Yes' को केवल 46 प्रतिशत मत मिले. दो दिनों तक चले इस मतदान में उम्मीद से कहीं ज्यादा 59 प्रतिशत टर्नआउट रहा. इस मुद्दे पर देश में काफी ध्रुवीकरण देखने को मिला.
यह जनमत संग्रह इटली की न्यायिक व्यवस्था में बड़े बदलावों से जुड़ा था. प्रस्तावित सुधारों में जज और अभियोजकों (प्रोसिक्यूटर) के करियर को अलग करने का प्रावधान शामिल था, ताकि वे एक-दूसरे की भूमिका में अदला-बदली न कर सकें.
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इसके अलावा 'हाई ज्यूडिशियल काउंसिल' की संरचना में बदलाव का भी प्रस्ताव था, जो जजों की नियुक्ति और अनुशासनात्मक मामलों की निगरानी करती है. सरकार इस काउंसिल को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटने और सदस्यों के चयन के तरीके में बदलाव करना चाहती थी जिसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला माना गया.
विश्लेषकों का मानना है कि जनमत संग्रह में हार से मेलोनी सरकार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक झटका लग सकता है. इससे सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मतभेद भी सामने आ सकते हैं और आने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बदल सकता है.
इस हार से न केवल इटली के भीतर मेलोनी की गठबंधन सरकार में दरारें उजागर हुई हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है. विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के खिलाफ उनके अलोकप्रिय युद्ध के साथ मेलोनी के जुड़ाव पर अब सवाल उठने लगे हैं.