अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु बम नहीं बना पाएगा. ट्रंप ने कहा कि इतिहास के सबसे अनोखे देश के प्रेसिडेंट के तौर पर मुझे खतरों को किसी और दिन के लिए बढ़ने देने में कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरा मानना है कि समस्याओं को तब तक बढ़ने नहीं देना चाहिए जब तक उन्हें सुलझाना और मुश्किल न हो जाए.
ईरान पर अपनी नीतियां स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे पहले से कहीं बेहतर देश बना सकें, या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह से विनाश कर दूं?"
उन्होंने आगे सवालिया अंदाज़ में कहा, "क्या मैं उन्हें बिना बचने का मौका दिए जहन्नुम में धकेल दूं."
ट्रंप ने कहा, "मुझे एक बड़ा फ़ैसला लेना है. क्या ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता होगा जिससे वे फिर से अपना देश बना सकें और उसे पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर बना सकें. शायद मध्य पूर्व या दुनिया के सबसे महान देशों में से एक? या फिर मैं इस इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म कर दूं और वह भी इतनी तेज़ी से कि उन्हें दोबारा हत्या और तबाही मचाने का कोई मौका ही न मिले? क्या मैं उन्हें जहन्नुम में धकेल दूं, जहां उनके बचने या भविष्य में महान बनने की कोई उम्मीद न हो?"
"मैं यू.एन. सिक्योरिटी काउंसिल का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिसने कमर्शियल जहाजों पर ईरान के घिनौने आतंकवादी हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से पास किया. मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सिक्योरिटी काउंसिल के इतिहास में किसी भी अन्य प्रस्ताव की तुलना में इस प्रस्ताव को यू.एन. के सदस्य देशों से सबसे ज़्यादा को-स्पॉन्सर मिले."
हालांकि ट्रंप ने भरोसा जताते हुए कहा कि मुझे यकीन है कि चुनाव के ठीक बाद हम कोई समझौता कर लेंगे, क्योंकि ऐसा न करने का कोई मतलब नहीं बनता.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सभी देशों से अपील की है कि वे ईरान को "पूरी तरह से आर्थिक रूप से अलग-थलग करने" में अमेरिका का साथ दें.
उन्होंने कहा कि ईरान को तब तक अलग-थलग रखा जाना चाहिए जब तक वह कमर्शियल जहाजों पर हमले बंद न कर दे, अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़ न दे और "आतंकवाद को समर्थन देना बंद" न कर दे.
ट्रंप ने कहा, "यह आतंकवादी सरकार बुरा बर्ताव इसलिए कर रही है क्योंकि वे मजबूत और आत्मविश्वासी नहीं हैं, वे कमज़ोर और हताश हैं." "अगर हम एकजुट रहें, तो जल्द ही हम एक ऐसी दुनिया देखेंगे जो पिछले 51 सालों से चले आ रहे ईरानी आतंकवाद के खतरे से मुक्त होगी."
एटम बम नहीं बना सकेगा ईरान
ट्रंप ने कहा कि जिस दिन से मैंने राजनीति में कदम रखा मैं अपने रुख पर अडिग रहा हूं. मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा. जबकि दूसरों ने सिर्फ़ बातें कीं, मैंने काम करके दिखाया. दूसरों ने शांति की बात की, मैंने शांति स्थापित की. दूसरों ने खतरों को नज़रअंदाज़ किया, मैंने उनका डटकर सामना किया. दूसरों ने हिम्मत की बातें कीं, अमेरिका ने हिम्मत दिखाई. दूसरों ने ताकत का वादा किया, मैंने उस ताकत का इस्तेमाल करके अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाया.