अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल पीस प्राइज जीतने की चाहत किसी से छिपी नहीं है. राष्ट्रपति बनने के बाद से वह कई बार बोल चुके हैं कि नोबेल पीस प्राइज के असली हकदार वही हैं. हालांकि, अब ट्रंप का कहना है कि उन्हें नोबेल जीतने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
गुरुवार को वॉशिंगटन एग्जामिनर को दिए इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से उनकी नोबेल जीतने की संभावना बढ़ सकती है तो उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया. ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता. मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.'
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इस बात पर और जोर देकर पूछा गया तो उन्होंने वही बात दोहराई कि उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वर्ल्ड लीडर्स के नेताओं के साथ फोन कॉल पर नोबेल प्राइज का जिक्र नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, 'मैं नोबेल प्राइज के बारे में बात नहीं करता.'
ट्रंप की ये बातें उससे बिल्कुल उलट है जब वह अक्सर नोबेल प्राइज के बारे में बात करते थे और दावा करते थे कि दुनियाभर की लड़ाइयों को रुकवाने के लिए वह इस अवॉर्ड के हकदार हैं. जनवरी में उन्होंने कहा था कि उनका मानना है कि नोबेल के लिए दुनिया में और कोई उनके जितना हकदार नहीं है. हालांकि, ट्रंप यह भी कहते थे कि उनका मकसद जानें बचाना हैं, अवॉर्ड जीतना नहीं.
ट्रंप की ये टिप्पणी तब आई है, जब अमेरिका, ईरान में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चला रहा है. ट्रंप अपने इस ऑपरेशन को ईरान के लोगों की आजादी से जोड़ते हैं. इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ट्रंप खामेनेई और उनके शासन को आतंकी शासन बताते हैं.
हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नोबेल न मिलने पर निराशा जताई हो. पिछले साल जब नोबेल पीस प्राइज की घोषणा हुई थी तो उसके बाद उन्होंने कहा था, 'मैं चाहे कुछ भी कर लूं, मुझे नोबेल पीस प्राइज नहीं मिलेगा.'
नोबेल पुरस्कार देने वाली नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने पिछले साल पीस प्राइज वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारा कोरिना मचाडो को दिया था. जनवरी में वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के बाद मचाडो ने अपना नोबेल प्राइज ट्रंप को ऑफर किया था. लेकिन तब कमेटी ने कहा था कि नोबेल प्राइज को किसी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.