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आने वाले दिनों में स्कूल कैसे होंगे, चीन के वीडियो दिखा रहे हैं झलक!

इस फुटेज में एक बच्चे को स्कूल की मेन बिल्डिंग में कदम रखने से पहले डिसइंफेक्शन के कई स्टेप्स से गुजरते दिखाया गया है. वीडियो में दिखाए गए पांचों स्टेप्स वायरस के फैलाव से बचने वाली साइंटिफिक थ्योरीज पर आधारित हैं.

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वायरल वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट
वायरल वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

  • वीडियो में दिखीं बरती जाने वाली सावधानियां
  • WHO के नजरिए से मेल खा रहा है ये वीडियो

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार को रविवार को स्कूलों के लिए एडवाइजरी का नया सेट जारी किया. इसमें बताया गया है कि स्कूल दोबारा खुलने की स्थिति में बच्चों को Covid-19 महामारी से बचाने के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए. इससे पहले ही चीन के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर देखे जा रहे हैं जो स्कूलों को लेकर WHO के नजरिए से मेल खाते हैं.

WHO ने अपनी एडवाइजरी में Covid-19 की रोकथाम के लिए "पॉलिसी, प्रैक्टिस और इंफ्रास्ट्रक्चर" स्थापित करने की सिफारिश की. वायरल हुआ एक वीडियो पहले से ही ऐसे कुछ सुझाव दे रहा है.

इस क्लिप को कथित तौर पर हुनान प्रांत के एक किंडरगार्टन टीचर की ओर से अपलोड किया गया. ये दिखाने के लिए कि चीन के स्कूल फिर से कक्षाएं खोलने के लिए कितने तैयार हैं?

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इस फुटेज में एक बच्चे को स्कूल की मेन बिल्डिंग में कदम रखने से पहले डिसइंफेक्शन के कई स्टेप्स से गुजरते दिखाया गया है. वीडियो में दिखाए गए पांचों स्टेप्स वायरस के फैलाव से बचने वाली साइंटिफिक थ्योरीज पर आधारित हैं.

मिसाल के लिए, हाल ही में एक PEER REVIEWED (समकक्ष की ओर से समीक्षा की गई) स्टडी के मुताबिक कोरोना वायरस वुहान अस्पताल में कर्मचारियों के जूते के तले से चिपके हुए पाया गया. वीडियो में दिखाई देता है कि बच्चा जैसे ही स्कूल के गेट पर आता है एक स्टाफ की ओर से बच्चों के जूते के तले को डिसइंफेक्ट किया जाता है.

इसके बाद बच्चे के फेस मास्क को सावधानी से डिस्पोज करते दिखाया जाता है. फिर वो अपने हाथों को टच-फ्री डिवाइस से सैनिटाइज करता है. इसके बाद बच्चे के बैग और यूनिफॉर्म पर गर्म भाप का स्प्रे किया जाता है. आखिर में उसे स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ता है जिससे ये पता लगाया जा सके कि उसे बुखार या अन्य लक्षण तो नहीं है.

आखिरी चरण में वॉकलेक नामक एक रोबोट की मदद ली जाती है जो अब चीन के जूनियर स्कूलों में आम दिखता है. बॉट अपने कैमरे और सेंसर के साथ बच्चे के मुंह, जीभ, गले और हाथों को स्कैन करता है और तुरंत रिजल्ट देता है. बीमारी के लक्षण दिखने पर बच्चे को घर वापस भेजा जा सकता है.

बीजिंग में मिडिल और सीनियर स्कूल छात्र हालांकि कैंपस में प्रवेश के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग ऐप के जरिए अपने स्वास्थ्य की बार कोडिंग स्कैनिंग से पुष्टि करते हैं. वैश्विक महामारी के असल ग्राउंड जीरो वुहान में बीते हफ्ते 80 से अधिक सीनियर मिडिल और 38 सेकेंडरी वोकेशनल स्कूल दोबारा खोले गए.

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कक्षाएं पूरी ऐहतियात और सोशल डिस्टेंसिंग उपायों के साथ आयोजित की जा रही हैं. इनमें नियमित रूप से डिसइंफेक्शन और फेस मास्क पहनना अनिवार्य है. वैज्ञानिकों की ओर से जहां महामारी का असर अगले दो साल तक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, ऐसे में चीन से निकलने वाली ये तस्वीरें दुनिया भर के निकट भविष्य में स्टैंडर्ड प्रैक्टिस बन सकती हैं.

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