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ब्रिटिश PM की कार में ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर जासूसी कर रहा था चीन? पूर्व राजनयिक के दावे से मचा हड़कंप

ब्रिटेन में चीनी जासूसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. संसद की एक समिति के सामने दावा किया गया कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक कार में ऐसा ट्रैकिंग डिवाइस मिला था, जो चीन को डेटा भेजने में सक्षम था. इस दावे ने ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी वाहनों की निगरानी और चीनी तकनीक पर निर्भरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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चीन पर जासूसी का आरोप, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कार में मिला संदिग्ध ट्रैकिंग डिवाइस. (File Photo: Reuters)
चीन पर जासूसी का आरोप, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कार में मिला संदिग्ध ट्रैकिंग डिवाइस. (File Photo: Reuters)

क्या ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कार से चीन को डेटा भेजा जा रहा थी? ब्रिटिश संसद में सामने आए इस दावे ने सुरक्षा एजेंसियों, राजनीतिक हलकों और विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है. दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री की कार में एक ट्रैकिंग डिवाइस मिला था, जो सेलुलर मॉड्यूल के जरिए चीन को डेटा ट्रांसमिट करने में सक्षम था.

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब ब्रिटेन की संसदीय समिति के सामने एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक ने दावा किया कि साल 2022 में प्रधानमंत्री की सरकारी कार की सुरक्षा जांच के दौरान एक संदिग्ध डिवाइस का पता चला था. इस खुलासे ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ब्रिटेन के शीर्ष नेता विदेशी निगरानी के दायरे में थे.

यह दावा काउंसिल ऑन जियोस्ट्रेटजी के सीनियर एसोसिएट फेलो और चीन, हांगकांग, ताइवान में लंबे समय तक काम कर चुके पूर्व ब्रिटिश राजनयिक चार्ल्स पार्टन ने किया. उन्होंने हाउस ऑफ कॉमन्स की बिजनेस एंड ट्रेड कमेटी के सामने गवाही देते हुए कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कार से चीन को डेटा भेजा जा रहा था.

चार्ल्स पार्टन ने सांसदों से कहा, "साल 2022 में प्रधानमंत्री की कार सेलुलर मॉड्यूल के जरिए चीन को डेटा भेज रही थी. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, जो पक्का जानते हैं कि यह किसकी कार थी, ने मुझे इसकी जानकारी दी थी." उनका कहना था कि वरिष्ठ अधिकारी उस संबंधित वाहन की पहचान के बारे में पूरी जानकारी रखते थे.

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आखिर क्या होता है सेलुलर मॉड्यूल?

सेलुलर मॉड्यूल ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट होते हैं, जो किसी डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क के जरिए कम्युनिकेशन की सुविधा देते हैं. आधुनिक कारों में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. ये मॉड्यूल लोकेशन, तकनीकी जानकारी को सर्वर तक भेजने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि इसको सुरक्षा एजेंसियां खतरे के रूप में देखती हैं.

किस प्रधानमंत्री की कार में था डिवाइस?

इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह कार किस प्रधानमंत्री द्वारा इस्तेमाल की जा रही थी. हालांकि 2022 में ब्रिटेन में राजनीतिक अस्थिरता के कारण तीन अलग-अलग कंजर्वेटिव नेता प्रधानमंत्री पद पर रहे थे. उस समय क्रमशः बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस और ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन किसी एक नाम सामने नहीं आया है.

सील्ड कंपोनेंट के अंदर छिपा था डिवाइस!

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ट्रैकिंग डिवाइस चीन से आयात किए गए एक सील्ड कंपोनेंट के भीतर छिपा हुआ था. बताया गया कि इसे वाहन निर्माता कंपनी ने कार में लगाया था. मंत्रियों और राजनयिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सरकारी गाड़ियों की नियमित सुरक्षा जांच के दौरान अधिकारियों को इसका पता चला था. 

संसद में चीन की तकनीक को लेकर चेतावनी

इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की विस्तृत पड़ताल की थी. चार्ल्स पार्टन ने इस घटना का हवाला देते हुए सांसदों को चीन निर्मित सेलुलर मॉड्यूल्स की बढ़ती मौजूदगी को लेकर आगाह किया. उन्होंने कहा कि चीन इस क्षेत्र में लगभग एकाधिकार स्थापित करना चाहता है और इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है.

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सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं सेलुलर मॉड्यूल

चार्ल्स पार्टन ने समिति से कहा, "चीनी सेलुलर मॉड्यूल बनाने में मोनोपॉली चाहते हैं. वे इसमें पहले से ही काफी अच्छा कर रहे हैं." उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी तकनीक सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है. आज सेलुलर मॉड्यूल्स हवाई जहाजों, औद्योगिक उपकरणों, स्मार्ट डोरबेल और अनेक रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं.

'यदि चाहें तो आपकी गाड़ियां बंद कर सकते हैं'

इस सुनवाई के दौरान चार्ल्स पार्टन ने एक और बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि यदि किसी देश के पास इन मॉड्यूल्स पर नियंत्रण हो तो वह बड़े स्तर पर व्यवधान पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा, "यदि चीनी आपकी सभी गाड़ियों को बंद करना चाहते हैं, क्योंकि उन सभी में सेलुलर मॉड्यूल लगे हैं, तो यह मुश्किल नहीं होगा."

इस दावे पर ब्रिटिश सरकार ने क्या कहा?

हालांकि ब्रिटिश अधिकारियों ने अब तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है. सरकार ने इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. एक सरकारी सूत्र ने डेली मेल को बताया कि अधिकारी प्रधानमंत्री की कार से जुड़े इस दावे को स्वीकार नहीं करते. एक प्रवक्ता ने कहा, "हम सुरक्षा मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करते."

जासूसी को चीन ने बताया 'कोरी अफवाह'

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चीन ने भी इस तरह के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. जब पहली बार इस डिवाइस की खबरें सामने आई थीं, तब बीजिंग ने इन्हें बेबुनियाद और अफवाह करार दिया था. चीनी अधिकारियों का कहना है कि सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को राजनीतिक रंग देना गलत है. इसे चीनी कंपनियों को बदनाम करने की कोशिश बताया है.

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