दो रिसर्च रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि रूसी तेल पर ब्रिटेन के प्रतिबंधों के बावजूद भी ब्रिटेन में रूस का तेल आयात किया जा रहा है. रिसर्च में कहा गया है कि रूसी तेल भारत के जरिए ब्रिटेन पहुंच रहा है.
भारत से रिफाइन किया हुआ रूसी तेल खरीदना गैर-कानूनी नहीं है लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे रूस पर लगे प्रतिबंध कमजोर होते हैं, जो उसके राजस्व पर चोट पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं.
ब्रिटिश सरकार का कहना है कि साल 2022 में यूक्रेन पर हमले को देखते हुए रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों के बाद से उसने रूस से कच्चे तेल का आयात नहीं किया है. सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 'उत्पत्ति के नियम' का नियम भी कहता है कि कच्चे तेल को अगर कोई देश रिफाइन कर दूसरे देश को बेचता है तो तेल उसी देश का माना जाएगा न कि कच्चे तेल उत्पादक देश का.
रूस कच्चे तेल से बड़ा राजस्व हासिल करता है और जब उसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया तब ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों ने उस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए. तेल से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बीबीसी को दो रिपोर्टों से पता चला है कि रिफाइनिंग को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय नियम हैं, उस वजह से रूसी तेल ब्रिटेन पहुंच रहा है.
ब्रिटेन और यूरोपीय देशों को धड़ल्ले से मिल रहा रूसी तेल
द सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंट क्लीन एनर्जी (CREA) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 'रिफाइनिंग लूपहोल' यानी रूसी तेल पर प्रतिबंध न लगाने वाले भारत और चीन रूसी तेल आयात कर रहे हैं और इसे रिफाइन कर जेट फ्यूल और डीजल बना रहे हैं. भारत और चीन रिफाइन किए गए रूसी तेल को ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन को बेच रहे हैं.
CREA के यूरोप-रूस नीति और ऊर्जा एनालिसिस के प्रमुख आइजक लेवाई का कहना है, 'इस लूपहोल के साथ समस्या यह है कि इससे रूसी तेल की मांग बढ़ गई है. रूसी तेल खूब बिक रहा है और उसकी कीमत भी बढ़ रहा है जिससे युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए रूस के राजस्व में फायदा हो रहा है.'
ब्रिटिश जहाजों में इस्तेमाल हुआ रिफाइंड रूसी तेल
एक अन्य रिसर्च पेपर में कैंपेन ग्रुप ग्लोबल विटनेस ने अनुमान लगाया है कि साल 2023 के दौरान ब्रिटेन ने रूसी कच्चे तेल को रिफाइन किया हुआ 52 लाख बैरल रिफाइन पेट्रोलियम खरीदा. इसमें 46 लाख बैरल जेट फ्यूल था जिसे ब्रिटेन की 20 विमानों में इस्तेमाल किया गया.
ग्लोबल विटनेस यूक्रेन टीम की कैंपेन प्रमुख लेvlला स्टेनली ने कहा, 'ब्रिटेन सरकार यूक्रेन में युद्ध की निंदा करने के लिए तैयार है, लेकिन वह इस रिफाइनिंग लूपहोल को खुला रखकर रूसी तेल की बिक्री में भागीदार बनी हुई है. रूसी तेल पर खर्च किया गया हर एक पाउंड पुतिन को उनके क्रूर युद्ध में मदद करता है.'
CREA ने जो आंकड़े साझा किए हैं उसके मुताबिक, अनुमान है कि दिसंबर 2022 में रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के पहले 12 महीनों में ब्रिटेन ने रिफाइन पेट्रोलियम के लिए जितना भुगतान किया, उसमें 56.9 करोड़ पाउंड रूसी कच्चे तेल से बने रिफाइन पेट्रोलियम के लिए खर्च किया गया.
दोनों रिपोर्टों में दावा किया गया कि तथाकथित लूपहोल के कारण अप्रत्यक्ष रूप से रूस को कर राजस्व में 10 करोड़ पाउंड से अधिक फायदा हुआ.