बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर भारी हंगामा शुरू हो गया है. ढाका में नेशनल प्रेस क्लब के बाहर शनिवार को अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. ये प्रदर्शन एक हिंदू युवक, हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी के विरोध में हो रहा था.
अल्पसंख्यक नेताओं का आरोप है कि हरिदास पर मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाए गए हैं. वो ये दावा कर रहे हैं कि गायकबंधा जिले के पलाशबाड़ी में भगवान राम की 81 फीट ऊंची विशालकाय प्रतिमा के निर्माण को रोकने के लिए सरकार ने ये मनगढ़ंत कार्रवाई की है.
'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के आयोजित इस प्रदर्शन में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के नेता एकजुट हुए. सभी ने प्रशासन पर धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और हरिदास की तुरंत रिहाई की मांग की.
गिरफ्तारी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन
एकता परिषद के महासचिव मनिंद्र कुमार नाथ ने इस गिरफ्तारी की आलोचना की. उन्होंने कहा, 'सरकार ने दो-तीन दिन पहले हरिदास चंद्र तरणी दास को इस दावे पर गिरफ्तार किया कि उन्होंने पलाशबाड़ी में रामचंद्र देवता की मूर्ति बनाई थी. हम तरणी दास की इस तरह की गिरफ्तारी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते.'
मनिंद्र कुमार नाथ ने देश के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले दो सालों से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और कानूनी कार्रवाइयों का एक दौर चल रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले साल पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ 3,000 से ज्यादा घटनाएं हुईं, जिनमें 66 लोगों की हत्या कर दी गई और कट्टरपंथियों ने कई मंदिरों पर हमले किए.
क्या हैं पुलिस के आरोप?
बांग्लादेश के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) का दावा अलग है. सीआईडी ने हरिदास को करीब 9.35 करोड़ टका के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सीआईडी ने ये भी दावा किया है कि हरिदास साल 2010 में अवैध रूप से भारत गए थे और बाद में 2019 में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था.
हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं. उनका मुख्य मकसद पलाशबाड़ी में चल रहे 81 फीट ऊंचे राम मंदिर और मूर्ति के निर्माण को रोकना है. सुरक्षा चिंताओं और भारी दबाव के कारण इस भव्य परियोजना का काम पहले ही रोकना पड़ा है.
भगवान राम की तस्वीर का अपमान!
एकता परिषद के वरिष्ठ नेता सुब्रत चौधरी ने बांग्लादेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कहा, 'अगर हमारे धर्म का अपमान करने वालों और झूठे मामले दर्ज करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो हम बांग्लादेश में एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.'
इसके साथ ही, 'संयुक्त सनातनी समाज' के बैनर तले ढाका के शाहबाग में हिंदुओं ने मशाल जुलूस निकाला और ह्युमन चेन बनाई. ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी इसके विरोध में रैली निकाली. प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने 8 मांगें रखी हैं, जिसमें अल्पसंख्यक सुरक्षा आयोग का गठन और भगवान राम की तस्वीर का अपमान करने वालों को सजा देने की मांग शामिल है.
दरअसल गैबांधा में भगवान राम की तस्वीर के 'अपमान' के बाद हिंदू समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था.
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भारत सरकार ने जताई चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने भी अपनी चिंता जताई है. नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने बांग्लादेश से हिंदू देवी-देवताओं और उनकी छवियों के अपमान की खबरें देखी हैं, जिससे वहां प्रदर्शन शुरू हुए हैं. हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार वहां के चरमपंथी तत्वों पर लगाम लगाएगी और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा करेगी.'