मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिगड़ते हालात के बीच बहरीन ने अपने रुख में नरमी दिखाई है. बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पेश किए जाने वाले मसौदा प्रस्ताव में अहम बदलाव किए हैं. यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब रूस और चीन की ओर से संभावित वीटो की आशंका जताई जा रही थी.
सूत्रों के मुताबिक, बहरीन द्वारा तैयार किए गए संशोधित ड्राफ्ट में अब संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VII का स्पष्ट उल्लेख हटा दिया गया है. यह प्रावधान सुरक्षा परिषद को कड़े कदम उठाने, जैसे आर्थिक प्रतिबंध या सैन्य कार्रवाई की अनुमति देता है. पहले के ड्राफ्ट में इस अध्याय का जिक्र शामिल था, जिसे अमेरिका और खाड़ी देशों का समर्थन हासिल था.
हालांकि, नए प्रस्ताव में 'all necessary means' यानी जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने वाली बात को बरकरार रखा गया है. इसके तहत देश अकेले या बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, खाड़ी और ओमान की खाड़ी में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं. लेकिन 'Binding Enforcement' के स्पष्ट संदर्भ को हटा दिया है. इसके तहत यह प्रस्ताव कानूनी रूप से सभी देशों को इसे मानना पड़ता.
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है. लेकिन हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले हुए हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर लगभग विराम लग गया है. खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था इसी मार्ग पर टिकी है, इसलिए सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया है.
बहरीन के शुरुआती मसौदे को अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों का समर्थन प्राप्त था. इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के 'चैप्टर VII' का स्पष्ट उल्लेख किया गया था. यह सुरक्षा परिषद को आर्थिक प्रतिबंधों से लेकर सैन्य बल के उपयोग तक की अनुमति देने का अधिकार देता है. राजनयिकों सूत्रों के अनुसार, रूस और चीन (जो ईरान के करीबी सहयोगी हैं) इस तरह के सख्त प्रस्ताव पर कभी सहमत नहीं होते.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए 9 वोटों की आवश्यकता होती है और 5 स्थायी सदस्यों (P5) में से किसी का भी वीटो नहीं होना चाहिए. रूस और चीन द्वारा वीटो किए जाने की प्रबल संभावना को देखते हुए बहरीन को कदम पीछे खींचने पड़े.
रॉयटर्स द्वारा देखे गए संशोधित मसौदे में अब 'अध्याय VII' का संदर्भ नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कुछ शक्तियों को घुमा-फिराकर रखा गया है. इसमें स्वैच्छिक गठबंधन की बात है, जो कि देशों को अकेले या स्वैच्छिक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन के माध्यम से कार्य करने के लिए अधिकृत करेगा. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय जहाजों में हस्तक्षेप रोकने और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परिस्थितियों के अनुरूप सभी आवश्यक साधनों के उपयोग की अनुमति दी गई है. मसौदा उन देशों को प्रोत्साहित करता है जो इस व्यापार मार्ग पर निर्भर हैं कि वे अपने मर्चेंट जहाजों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट सेवाओं सहित रक्षात्मक प्रयासों में समन्वय करें.
विशेषज्ञों का मानना है कि बहरीन का यह नरम रुख वैश्विक कूटनीति की मजबूरियों को दर्शाता है, जहां बड़े देशों के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो जाता है. वहीं, होर्मुज संकट का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर साफ तौर पर दिखने लगा है.