म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की को पांच साल से अधिक समय बाद गुरुवार को अपने बेटे किम एरिस से फोन पर बात करने की अनुमति दी गई. फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से हिरासत में रह रहीं आंग की यह अपने बेटे से 5 साल में पहली फोन बातचीत है. किम एरिस ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत की जानकारी देते हुए कहा कि मां की आवाज दोबारा सुनना उनके लिए शब्दों से परे अनुभव है. इसे बयां करना इतना आसान नहीं है.
किम एरिस ने फेसबुक पर लिखा, "आज पांच साल से अधिक समय बाद आखिरकार मैं अपनी मां, दाउ आंग सान सू ची से बात कर पाया."
म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के प्रवक्ता खाइंग खाइंग सो ने भी इस बातचीत की टेलीग्राम पर पुष्टि की. उनके मुताबिक, यह फोन कॉल करीब 20 मिनट तक चली. सू ची राजधानी नेपीडॉ में किसी अज्ञात स्थान पर नजरबंद हैं, जबकि उनका बेटा लंदन स्थित म्यांमार दूतावास से उनसे बात कर रहा था.
क्या जिंदा है मां, सबूत तो दो...
सू की के छोटे बेटे एरिस, जो लंदन में रहते हैं, ने म्यांमार के अन्य लोकतंत्र कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक ऑनलाइन अभियान चलाया था. इस अभियान के ज़रिए उन्होंने इस बात का सबूत मांगा कि उनकी मां जीवित और सुरक्षित हैं. 2021 में सत्ता पर कब्ज़े के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है, और वे कहां हैं, किस हालत में हैं, इस बारे में जानकारी आम लोगों से छिपाकर रखी गई है.
किम एरिस ने कहा कि उनकी मां 81 वर्ष की हैं और उन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में रखा गया है. उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे सू की को आजादी मिलने तक आवाज उठाते रहें. उन्होंने लिखा कि उनकी मां और सभी राजनीतिक कैदियों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, आजादी पर कोई समझौता नहीं हो सकता.
2021 के तख्तापलट के बाद से कैद हैं सू ची
आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार को फरवरी 2021 में सेना ने सत्ता से बेदखल कर दिया था. इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया गया है. इसके बाद वह 18 साल की जेल की सजा काट रही हैं. उनके समर्थकों और मानवाधिकार संगठनों ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है.
अगस्त में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) के एक प्रतिनिधि ने सू की से मुलाकात की थी. फरवरी 2021 में हिरासत में लिए जाने के बाद किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन के प्रतिनिधि से उनकी यह पहली ज्ञात मुलाकात थी.
राजा चार्ल्स की किताबें भी पहुंचाई गईं
म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार ने सोमवार को बताया था कि ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय की ओर से भेजी गई दो किताबें सू की तक पहुंचाई गई हैं. इनके साथ एक सीलबंद लिफाफा और राजनयिक पत्राचार भी भेजा गया था. इसके कुछ ही दिन बाद बेटे से फोन पर बातचीत की अनुमति मिलना अहम माना जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय अलगाव को खत्म करने की कोशिश
माना जा रहा है कि मिन आंग ह्लाइंग की सरकार म्यांमार के अंतरराष्ट्रीय अलगाव को खत्म करने और पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रही है. इस साल की शुरुआत में हुए चुनाव को आलोचकों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष मानने से इनकार किया था. उनका आरोप है कि चुनाव के जरिए सेना की सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश हुई.
इस बीच, म्यांमार की सेना लोकतंत्र समर्थक गुरिल्ला समूहों और जातीय विद्रोही संगठनों के खिलाफ संघर्ष जारी रखे हुए है. आसियान समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सू की की रिहाई और म्यांमार के राजनीतिक संकट के समाधान के लिए उनसे संवाद की मांग की है, लेकिन सरकार इन मांगों को स्वीकार नहीं कर रही है.