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'I Am Alive...', घास-चींटी खाकर जिंदा रहा, अमेरिका ने दुश्मन के इलाके से अपने पायलट को किया था रेस्क्यू

3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिकी F-15E जेट को मार गिराया, जिसके बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ऑपरेशन चलाया और अपने दोनों पायलटों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया. इस मिशन ने 1995 के बोस्निया युद्ध के एक रेस्क्यू ऑपरेशन की याद दिला दी, जिसमें कैप्टन स्कॉट ओ'ग्रेडी को दुश्मन के इलाके से छह दिन बाद बचाया गया था.

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अमेरिका ने 30 साल पहले अपने एक पायलट को दुश्मन से इलाके से रेस्क्यू किया था
अमेरिका ने 30 साल पहले अपने एक पायलट को दुश्मन से इलाके से रेस्क्यू किया था

अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही जंग के बीच 3 अप्रैल को ईरान ने एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को मार गिराया. फाइटर जेट तबाह हो गया और उसके दोनों क्रू ने खुद को बचाने के लिए सीट समेत खुद को प्लेन से सुरक्षित इजेक्ट कर लिया. अपने क्रू को बचाने के लिए अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खतरनाक पहाड़ों में बड़ा 'कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू टास्क फोर्स' (CSAR) ऑपरेशन शुरू किया और कुछ ही घंटों के अंदर एक क्रू को ईरान से रेस्क्यू कर लिया गया.

F-15E एक दो-सीटर विमान होता है, जिसमें एक पायलट और एक वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर होता है. दूसरे क्रू को बचाने के लिए अमेरिकी HC-130 और दो HH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर ईरान में बेहद नीची उड़ान भरते दिखे. अमेरिका ने अपने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए रविवार, 5 अप्रैल को दूसरे पायलट को भी जिंदा रेस्क्यू कर लिया.

यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा रहा क्योंकि इसे ईरान की संकरी पहाड़ियों की भूल-भुलैया के बीच चलाया गया. ईरान ने भी अमेरिकी पायलट को पकड़ने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी और सेना के साथ-साथ स्थानीय ईरानी भी अमेरिकी पायलट की तलाश में थे. ईरानी सुरक्षा बलों को नीचे उड़ रहे अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर गोलीबारी भी की ताकि CSAR ऑपरेशन को विफल किया जा सके.

इस ऑपरेशन को हालांकि, अमेरिका ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. इस रेस्क्यू मिशन ने 30 साल पहले के एक ऑपरेशन की याद दिला दी जिसमें एक अमेरिकी पायलट को छह दिन बाद बोस्निया में दुश्मन के इलाके से रेस्क्यू किया गया था.

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जब दुश्मन के इलाके में घुसकर अमेरिका निकाल लाया था अपना पायलट

यह कहानी है 1995 के बोस्निया युद्ध की. अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के रक्षा संगठन NATO ने बोस्निया के खिलाफ ऑपरेशन डिनाई प्लाइट (Deny Flight) शुरू किया था. अमेरिकी एयर फोर्स के कैप्टन स्कॉट ओ'ग्रेडी, जिनका कॉल साइन Basher-52 था, इस ऑपरेशन का हिस्सा थे. 

2 जून 1995: मिशन और शूटडाउन

2 जून 1995 को दोपहर करीब 3:03 बजे, कैप्टन स्कॉट अपने विंगमैन कैप्टन रॉबर्ट गॉर्डन 'विल्बर' राइट के साथ F-16C जेट्स में बोस्निया के ऊपर नो-फ्लाई जोन की पेट्रोलिंग कर रहे थे.

कैप्टन स्कॉट ने अपने सर्वाइवल की पूरी कहानी को अपनी किताब 'Basher Five-Two: The True Story of F-16 Fighter Pilot Captain Scott O’Grady' में बताया है. स्कॉट लिखते हैं कि पेट्रोलिंग के पूरे रास्ते में कई मिसाइल साइट्स पड़ती थीं जिनका उन्हें पता था.

अपनी किताब में वो लिखते हैं, 'हम जानते थे कि हमें उत्तर और पूर्व में बोस्नियाई सर्बों (सर्बियन बोलने वाले बोस्नियाई) के SAM (सरफेस-टू-एयर मिसाइल) क्षेत्रों से दूर रहना है. बोस्निया के ये मिसाइल क्षेत्र हमारे एडवांस डिफेंस सिस्टम के बावजूद F-16 के लिए एक गंभीर खतरा थे.'

लेकिन उसी रास्ते में बोस्नियाई सर्बों ने एक मोबाइल मिसाइल साइट भी तैनात कर रखी थी जिसे अमेरिकी इंटेलिजेंस पहचान नहीं सका और इसी जाल में अमेरिकी कैप्टन फंस गए.

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स्कॉट का फाइटर जेट अपने तय रास्ते में कुछ दूर ही गया होगा कि उनके हेडसेट में अलार्म बज उठा. खतरा पूरब से आ रहा था. वो अपनी किताब में लिखते हैं, 'मेरा पेट मरोड़ खा गया. शिकार बनने की बारी मेरी थी. मुझे पता था कि मुझे सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहना होगा.'

बोस्नियाई सर्बों ने मोबाइल SAM लॉन्चर से बिना रडार की मदद के दो मिसाइलें दागीं और रडार तब चालू किया जब मिसाइलें स्कॉट के जेट से कुछ ही सेकंड दूर थीं.

वो लिखते हैं, 'मिसाइलों ने मुझे अचानक चौंका दिया, वो नीचे बादलों के बीच से ऊपर आ रही थीं. एक मिसाइल ने जेट के निचले हिस्से पर हमला किया और दूसरा फ्यूल टैंक पर फटा. मेरा विमान F-16 दो हिस्सों में टूट गया.'

कॉकपिट में आग फैल गई, हीट बढ़ गई. प्लेन अनियंत्रित होकर घूमने लगा. पलक झपकते ही कैप्टन स्कॉट ने ईजेक्शन हैंडल खींचा और सीट के साथ बाहर निकल गए. लेकिन जेट में विस्फोट से उन्हें काफी चोट आई. उनकी गर्दन और कंधे पर जलन के निशान पड़ गए.

दुश्मन के इलाके में गिरे स्कॉट, 'छह दिन' तक मौत ने किया पीछा

पलभर में स्कॉट बीच आसमान में थे, स्कॉट ने अपना पैराशूट मैन्युअली खोला. वो करीब 26,000 फीट की ऊंचाई से 25 मिनट तक गिरते रहे. उनकी लैंडिंग तो सुरक्षित रही लेकिन वो दुश्मन के इलाके में गिरे और लैंडिंग के दौरान उन्होंने सर्ब पैरामिलिट्री सैनिकों को नीचे अपनी तरफ दौड़ते देखा.

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दुश्मन सैनिकों को कैप्टन का पैराशूट साफ-साफ दिख रहा था. पैराशूट (सफेद-भूरा-हरा-नारंगी) साफ दिख रहा था. जैसे ही वो जमीन पर गिरे, अपना पैराशूट हटाया, सर्वाइवल किट लिया और तुरंत जंग की तरफ भागे ताकि दुश्मन सेना उन्हें पकड़ न सके.

दुश्मन को पता था कि अमेरिकी पायलट उनके इलाके में ही छिपा है और वो उनकी तलाश में दिन-रात एक किए रहते. लेकिन अमेरिकी पायलट की ट्रेनिंग और साहस ने उन्हें छह दिन तक मौत की मुंह में जाने से बचाए रखा. अमेरिकी फाइटर जेट पायलटों के पास SERE (Survival, Evasion, Resistance and Escape) ट्रेनिंग होती है जो उन्हें दुश्मन के इलाके में बचाए रखती है और रेस्क्यू को आसान बनाती है.

Photo: AP

स्कॉट ने 17 दिन की SERE ट्रेनिंग ली थी और दुश्मन के इलाके में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग का पूरा फायदा उठाया. उन्होंने दिन में छिपकर रहना, रात में मूवमेंट करना, और रेडियो साइलेंट रखना सीखा था.

आमतौर पर, जब किसी विमान को दुश्मन क्षेत्र में गिरा दिया जाता है, तो सेना तेजी से अपने क्रू की संभावित लोकेशन, उनकी स्थिति, इलाका, मौसम और दुश्मन के खतरे के लेवल की जानकारी जुटाने लगती है. इस जानकारी के आधार पर यह तय किया जाता है कि रेस्क्यू टीम भेजना उचित होगा या बहुत ज्यादा रिस्की. इसके बाद एक विशेष रूप से तैयार 'कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू टास्क फोर्स' (CSARTF) का गठन किया जाता है.

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इस रेस्क्यू ऑपरेशन में हेलिकॉप्टर बहुत नीचे और धीमी गति से उड़ते हैं ताकि जीवित बचे व्यक्ति तक पहुंच सकें. इस ऑपरेशन में पैरा-रेस्क्यूमेन जमीन पर उतरते हैं. अगर व्यक्ति घायल है तो उसे तुरंत मेडिकल हेल्प दी जाती है और हेलिकॉप्टर तक ले जाया जाता है. कभी-कभी गोलीबारी के बीच भी पैरा-रेस्क्यूमेन क्रू को सुरक्षित बाहर निकालते हैं.

अमेरिका ने अपने पायलट को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और इधर, पायलट ने दुश्मनों से घिरे घने जंगल में जिंदा बचे रहने की जद्दोजहद! 

दुश्मन सेना के साथ छह-दिन की लुका-छिपी

छह दिनों के इस लुका-छिपी में कई बार दुश्मन सैनिक स्कॉट के बेहद करीब आए और चले गए.

पहले दो दिनों के दौरान, एक हेलीकॉप्टर इतना करीब आ गया कि कैप्टन सर्बियाई पायलटों के चेहरे तक देख सकते थे. जमीन पर मौजूद दुश्मन सैनिक हर हिलती-डुलती चीज पर गोली चला रहे थे. इनसे बचना कैप्टन स्कॉट के लिए बहुत मुश्किल रहा.

सैनिक राइफलें चलाते हुए कुछ फीट दूर से गुजरते, कैप्टन छिपने के लिए चेहरे पर मिट्टी मलते, घास में लेट जाते. कई बार सैनिकों ने वहां शूट किया जहां वो छिपे हुए थे लेकिन स्कॉट चुपचाप पड़े रहे. इस दौरान उनके साथ 29 पाउंड का सर्वाइवल बैग और 9mm बेरेटा पिस्तौल थी.

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दुश्मन के इलाके में फंसे अमेरिकी कैप्टन के पास न तो पर्याप्त पानी था न खाना. वो रेडियो के जरिए मदद भी नहीं मांग पा रहे थे क्योंकि उन्हें दुश्मन देश के सिग्नल पर पकड़े जाने का डर था. जंगल में फंसे अमेरिकी कैप्टन ने भूख-प्यास से निपटने के लिए अजीब चीजें की. स्कॉट ने भूख मिटाने के लिए पेड़ के पत्ते खाए, जमीन पर चलने वाली चींटियों को भी अपना निवाला बना लिया और कई बार छोटे पौधे भी नोचकर खाए.

अपनी किताब में वो लिखते हैं, 'मैंने कभी सोचा नहीं था कि दुश्मनों से जान बचाने के लिए मुझे भागना पड़ेगा, सैनिकों से बचते हुए छिपना होगा, जिंदा रहने के लिए पत्ते और चींटियां खानी पड़ेंगी. मैंने जंगल में रहते हुए गायों से दोस्ती कर ली.'

और चौथे दिन स्कॉट के पास पानी भी नहीं बचा था

उनके इमरजेंसी पैक में बहुत कम पानी था जिसे उन्होंने जैसे-तैसे चार दिन चलाया लेकिन चौथे दिन वो भी खत्म हो गया. ऐसे में प्रकृति ने उन्हें बचाए रखा और बारिश होने लगी. स्कॉट ने बारिश का पानी पिया लेकिन घायल अवस्था में बारिश में लंबे समय तक रहने से उनकी परेशानी और बढ़ गई.

उनके पास एक सर्वाइवल रेडियो था और वो समय-समय पर NATO के एयरबोर्न कमांड सेंटर से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करते थे, लेकिन अधिकतर समय अपना रेडियो बंद रखते ताकि दुश्मन को उनकी स्थिति का पता न चल जाए.

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छठी रात (7-8 जून 1995), कैप्टन ने अपने कॉल साइन 'बैशर फाइव-टू' का इस्तेमाल करते हुए आखिरकार अपने स्क्वाड्रन साथी कैप्टन टी. ओ. हैंफोर्ड से संपर्क स्थापित किया, हालांकि उनके पास भी ईंधन कम बचा था. रेडियो पर स्कॉट ने अपनी पहचान बताई- I Am Alive....Basher Five Two.' 

Photo: AFP/Getty Images

किसी तरह स्कॉट का मैसेज एड्रियाटिक सागर में मौजूद USS किर्सार्ज  तक पहुंचा और फिर उन्हें बचाने के लिए एक बेहद रिस्की कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया.

AH-1W कोबरा गनशिप, हैरियर और कई अन्य विमानों के साथ 24वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के दो अमेरिकी मरीन CH-53E सुपर स्टैलियन हेलीकॉप्टर 8 जून की सुबह दुश्मन के इलाके में पहुंच गए.

सुबह 6:35 बजे रेस्क्यू टीम कैप्टन के लोकेशन के पास पहुंची. कैप्टन ने अपनी सही स्थिति बताने के लिए येलो स्मोक फ्लेयर जलाया. वे जंगल से दौड़कर बाहर आए- पिस्तौल हाथ में, कीचड़ से सने हुए, भूखे और थके. मरीन्स ने उन्हें हेलिकॉप्टर CH-53E में खींच लिया.

पूरा ऑपरेशन ग्राउंड पर सिर्फ 7 मिनट चला. रेस्क्यू के बाद हेलिकॉप्टर तेजी से आसमान की तरफ बढ़ा लेकिन दुश्मन हमले के लिए तैयार था. रेस्क्यू टीम की तरफ दुश्मन सेना ने स्मॉल आर्म्स, एंटी-एयरक्राफ्ट और 3 शोल्डर-लॉन्च्ड मिसाइलें दागीं. एक बुलेट हेलीकॉप्टर के अंदर घुसी, कम्युनिकेशन गियर को हिट किया और एक मरीन के कैनटीन से टकराई. हालांकि, इसमें कोई घायल नहीं हुआ. 30 मिनट बाद वो एड्रियाटिक सागर के ऊपर थे, बिल्कुल सुरक्षित.

अमेरिकी कैप्टन का रेस्क्यू मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ. कैप्टन व्हाइट हाउस गए, जहां प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने उन्हें हीरो कहा.

कैप्टन स्कॉट कहते हैं कि दुश्मन के इलाके में उनकी जीवित बचे रहने का राज था- ईश्वर पर भरोसा, परिवार की याद, देश की सेवा, और SERE ट्रेनिंग. 

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