पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है. पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने पर टीएमसी ने अपने पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी की अनुशासन समिति ने रीजू दत्ता, कृष्णेंदु चौधरी, कोहिनूर मजूमदार, पापिया घोष और कार्तिक घोष को नोटिस भेजकर पूछा है कि पार्टी विरोधी टिप्पणियों और अनुशासनहीनता के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा. चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई.
चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दिया. कई नेताओं, पूर्व विधायकों और प्रवक्ताओं ने खुले तौर पर शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए.
टीएमसी प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पार्टी नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था. वहीं मालदा के वरिष्ठ टीएमसी नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने भी अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली की आलोचना की थी.
रीजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर चुनाव के बाद हिंसा रोकने को लेकर भाजपा सरकार की तारीफ की थी, जिसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया. इसी तरह पापिया घोष और कार्तिक घोष ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयान दिए थे.
पापिया घोष वरिष्ठ टीएमसी नेता रबींद्रनाथ घोष की बेटी हैं. रबींद्रनाथ घोष ने भी सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी की आलोचना की थी, हालांकि अभी तक उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है.
नोटिस में साफ कहा गया है कि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने पर पार्टी आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी. इस पूरे विवाद पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन और चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.