पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर गहरे संकट के बीच निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने खुले तौर पर बगावत का बिगुल फूंक दिया है.
पार्टी के अंदर मचे इस घमासान के बीच मामले के जानकार सूत्रों ने खुलासा किया है कि बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के 59 विधायकों का मजबूत समर्थन प्राप्त होने का बड़ा दावा ठोक दिया है, जिसके चलते विधानसभा का पूरा नंबर गेम अचानक बदल गया है.
ममता के पास सिर्फ 21 विधायक?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 59 विधायकों के बागी रुख अख्तियार कर लेने के बाद अब आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं. विधायकों का ये नंबर गेम बताता है कि टीएमसी इस वक्त पूरी तरह से मुश्किलों में घिरी हुई.
बताया जा रहा है कि टीएमसी के ये बागी विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं, जहां वह विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करेंगे. इसके लिए स्पीकर भी सदन पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि स्पीकर से मुलाकात के दौरान ऋतब्रत नेता प्रतिपक्ष के लिए अपनी बात रखेंगे.
क्या है बागी विधायकों की मांग
टीएमसी के इन बागी विधायकों की मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी के किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (लीडर ऑफ अपोजिशन) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए, जिसके लिए उन्होंने ये कड़ा रुख अपनाया है.
उधर, टीएमसी के बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किया है. हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए.
विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो इस अभूतपूर्व बगावत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास अब केवल 21 वफादार विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी के पूरी तरह विभाजित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है.
आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया.