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करोड़ों की उगाही, भ्रष्टाचार के आरोप... पुरी से गिरफ्तार किए गए TMC पार्षद सुशांत घोष

जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और जालसाजी के आरोपों में घिरे तृणमूल कांग्रेस के पार्षद सुशांत घोष को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. कोलकाता पुलिस की STF और ओडिशा पुलिस के संयुक्त अभियान में उन्हें पुरी से पकड़ा गया. आरोप है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की उगाही की है.

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दुकानों से करोड़ों की रंगदारी लेने का आरोप, मोबाइल नंबर बदलकर छिपे थे पार्षद. (File Photo: ITG)
दुकानों से करोड़ों की रंगदारी लेने का आरोप, मोबाइल नंबर बदलकर छिपे थे पार्षद. (File Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद सुशांत घोष को जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और जालसाजी के आरोपों के बीच ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार कर लिया गया. वो लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे, लेकिन कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और ओडिशा पुलिस के संयुक्त अभियान में दबोचा गया.

जानकारी के मुताबिक, सुशांत घोष कोलकाता नगर निगम (KMC) के तहत आने वाले कस्बा इलाके के पार्षद हैं. उनके खिलाफ जबरन वसूली, धमकी, भ्रष्टाचार और जालसाजी समेत कई गंभीर आरोपों में मामले दर्ज हैं. केस दर्ज होने के बाद से वह फरार चल रहे थे और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुशांत घोष काफी समय से गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे. विशेष इनपुट मिलने के बाद कोलकाता पुलिस और ओडिशा पुलिस की संयुक्त टीम ने पुरी में उनकी लोकेशन ट्रैक करके गिरफ्तार कर लिया. उन्हें कोलकाता लाया जा रहा है, जहां कानूनी कार्रवाई होगी.

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए सुशांत घोष ने ओडिशा में रहते हुए अपना मोबाइल नंबर भी बदल लिया था. हालांकि, पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और आखिरकार उनकी लोकेशन का पता लगा लिया. तकनीकी निगरानी से उनके ठिकाने का पता चला.

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इसके बाद संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया. सुशांत घोष ने पिछले महीने कोलकाता नगर निगम के बरो XII के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, वो अभी भी पार्षद के पद पर बने हुए हैं. उनकी गिरफ्तारी के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

पुलिस का कहना है कि उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और कई अहम तथ्य सामने आए. जांच में सामने आया है कि एक फुटपाथ की दुकान को फर्जी दस्तावेजों के जरिए 3.5 लाख में बेचने का मामला भी सुशांत घोष से जुड़ा हुआ है. 

इस संबंध में शिकायत आनंदपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी. इसे राजडांगा स्कूल रोड निवासी एक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी. उसका आरोप है कि इलाके में फुटपाथ दुकानों के आवंटन और बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं. उस इलाके में करीब 900 दुकानों को संचालन की अनुमति दी गई थी. 

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन दुकानों के आवंटन और संचालन में कहीं कोई वित्तीय गड़बड़ी तो नहीं हुई. सुशांत घोष पर सबसे गंभीर आरोप हॉकर्स और स्थानीय व्यापारियों से बड़ी रकम वसूलने का है. इलाके में फुटपाथ पर स्टॉल लगाने के लिए लोगों से लाखों रुपए लिए गए.

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29 मई को ईएम बाईपास-रूबी क्रॉसिंग इलाके में काम करने वाले हॉकर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि पार्षद की ओर से फुटपाथ पर स्टॉल लगाने की अनुमति देने के बदले 3 से 4 लाख रुपए तक की रकम जबरन मांगी जाती थी.

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस रैकेट के जरिए हॉकर्स से करीब 3 करोड़ रुपए वसूले गए. उन्होंने मामले में पुलिस से हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की थी. सुशांत घोष के ड्राइवर को पहले ही ओडिशा सीमा के पास गिरफ्तार किया जा चुका था. उसके बाद जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले. 

इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस ने फरार पार्षद की तलाश तेज की और पुरी से गिरफ्तार कर लिया. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित उगाही नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे. पुलिस इस मामले में वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य आरोपों की भी जांच कर रही है.

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