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ममता बनर्जी की शहीद दिवस रैली पर सस्पेंस, कांग्रेस का मेगा प्लान... इस बार 21 जुलाई किसकी?

ममता बनर्जी टीएमसी की स्थापना के बाद से ही हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाती आई हैं, बड़ी रैली को संबोधित करती आई हैं. कोलकाता के धर्मतला मैदान में इस रैली की तैयारियां दो महीने पहले से ही शुरू हो जाती थीं. इस बार टीएमसी इस आयोजन को लेकर कुछ भी तय नहीं कर पाई है. 

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कांग्रेस के आयोजन में शामिल हो सकते हैं शीर्ष नेता (Photo: ITG)
कांग्रेस के आयोजन में शामिल हो सकते हैं शीर्ष नेता (Photo: ITG)

'चिरदिन कहारो समन नहीं जाए'! नजरुल का साल 1973 में रिलीज हुआ यह गीत पश्चिम बंगाल में आज के राजनीतिक परिदृश्य में बिल्कुल फिट बैठता है. ऐसे माहौल में कांग्रेस अरसे बाद पश्चिम बंगाल के सियासी विमर्श में चर्चा का विषय बनकर उभरी है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस 21 जुलाई को एक बड़ा आयोजन कर रही है. यह तारीख तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी शहीद दिवस के रूप में मनाती आई हैं.

पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए 21 जुलाई की तारीख और ममता बनर्जी की विशाल जनसभा एक-दूसरे के पूरक रहे हैं. इस तारीख पर ममता के साथ ही लेफ्ट भी जनसभाएं करता आया है, लेकिन इस बार सबकुछ जैसे उलट-पुलट गया है. बंगाल के सियासी गलियारों में कांग्रेस के इस बड़े कदम को देखते हुए अब चर्चा इस बात को लेकर तेज हो गई है कि इस बार 21 जुलाई की तारीख किसकी होगी, कांग्रेस की या ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी की?

ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि टीएमसी अब तक यह तक तय नहीं कर पाई है कि 21 जुलाई को वह क्या करेगी और कहां करेगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही एक के बाद एक, बड़े नेता ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहीं ममता बनर्जी इस बार शहीद दिवस के आयोजन को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई हैं. टीएमसी के आयोजन की तैयारियां धर्मतला मैदान में हर बार दो महीने पहले ही शुरू हो जाती थीं.

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टीएमसी कैडर के साथ ही आम लोग भी दीदी की इस रैली पर उत्साह के साथ नजरें टिकाए रखते थे कि वह क्या संदेश देती हैं. ममता बनर्जी की पार्टी जब विपक्ष में थी, तब भी टीएमसी 21 जुलाई का आयोजन बड़े स्तर पर करती थी. इस बार ऐसा नहीं है. टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शहीद दिवस को लेकर कहा है कि अभी कुछ तय नहीं है. इसके उलट इस बार पश्चिम बंगाल कांग्रेस 21 जुलाई के दिन बड़े कार्यक्रम के आयोजन को लेकर पूरी गंभीरता के साथ तैयारियों में जुट गई है.

21 जुलाई के लिए कांग्रेस का प्लान क्या 

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने शहीद मीनार पर 21 जुलाई मनाने का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस की प्रवक्ता सुमन रॉयचौधरी ने aajtak.in से कहा कि इस आयोजन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमने शीष नेतृत्व से इस आयोजन में शामिल होने कोलकाता आने का आग्रह किया है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक अन्य नेता ने दावा किया कि इस आयोजन में राहुल गांधी के शिरकत करने की संभावना अधिक है.

21 जुलाई की तारीख इतनी महत्वपूर्ण क्यों

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साल 1993 की बात है. तब ममता बनर्जी कांग्रेस पार्टी में हुआ करती थीं. वह युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं और फोटो वाले मतदाता पहचान पत्र की मांग को लेकर 21 जुलाई 1993 के दिन महाकरण अभियान का आह्वान किया था. शुरुआत में इस आयोजन के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की गई थी, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल नुरुल हसन के निधन के कारण इस अभियान की नई तारीख 21 जुलाई करनी पड़ी.

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ममता बनर्जी की अगुवाई में हुए इस आंदोलन के दौरान पूरा कोलकाता शहर आग की लपटों से घिर गया. इस आंदोलन का केंद्र सेंट्रल कोलकाता था. धीरे-धीरे पूरा कोलकाता शहर उग्र प्रदर्शन की चपेट में आ गया. उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी भी फूंक दी. उग्र प्रदर्शनकारी आगे बढ़े और पुलिस जगह-जगह पीछे हटने लगी. हालात बिगड़े और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायर झोंक दिया.

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पुलिस की गोलीबारी में युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए थे. कांग्रेस पार्टी अपने इन 13 कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने, उन्हें याद करने के लिए 21 जुलाई को आयोजन करती आ रही है. ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर जब टीएमसी बनाई, तब भी हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस का आयोजन करना शुरू कर दिया. ममता बनर्जी टीएमसी की स्थापना से लेकर अब तक, हर वर्ष शहीद दिवस पर बड़ा आयोजन करती आई है, लेकिन इस बार क्या टीएमसी शहीद दिवस का ट्रेंड बरकरार रखेगी या यह टूट जाएगा?

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