पश्चिम बंगाल के विकास और रोजगार के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े बजट को मंजूरी दी है. इस फैसले से राज्य के ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को इस वित्तीय मदद की आधिकारिक घोषणा की. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ये विशेष फंड जारी किया है. इस बड़े फंड के मिलने के बाद राज्य में विकास कार्यों को लेकर हलचल भी तेज हो गई है.
पश्चिम बंगाल को विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) योजना के तहत कुल 8,508 करोड़ रुपये का फंड मिला है. पूरे देश में उत्तर प्रदेश के बाद बंगाल को सबसे ज्यादा रकम दी गई है. उत्तर प्रदेश के लिए इस योजना में 9,721.48 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है.
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार
इसके साथ ही ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए भी अलग से बजट स्वीकृत हुआ है. ग्राम सड़क योजना के तहत केंद्र ने कुल 2,400 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इस कुल राशि में से 1,000 करोड़ रुपये की पहली किस्त केंद्र सरकार ने जारी भी कर दी है.
इस नई VB-G RAM G योजना ने अब पुरानी मनरेगा योजना की जगह ले ली है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा 'केंद्र ने इस स्कीम के तहत पश्चिम बंगाल के लिए लगभग 8,500 करोड़ रुपये का फंड दिया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोज़गार मिल सकेगा.'
शुभेंदु अधिकारी ने ये महत्वपूर्ण जानकारियां पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम से दीं. उन्होंने वहां से राज्य-व्यापी 'जन कल्याण शिविर' कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम के जरिए सरकार सीधे जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
जन कल्याण शिविर और कड़े नियम
राज्य भर में 15 जून से 17 जून तक कुल 1,100 शिविर लगाए जा रहे हैं. इन शिविरों का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया गया है. यहां लोग आयुष्मान भारत और अन्नपूर्णा योजना जैसी 54 सरकारी योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं.
इस अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा 'पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का ये अपनी तरह का पहला आउटरीच कार्यक्रम है. लोग विभिन्न कल्याणकारी स्कीमों के बारे में जानने और नामांकन के लिए आवेदन जमा करने के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच शिविरों में जा सकते हैं.'
इस अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के समय डेटाबेस में गड़बड़ी का आरोप लगाया. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'हम चाहते हैं कि लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचे, ना कि फर्जी खाताधारकों तक.'
क्या है पुराना विवाद?
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं अवैध प्रवासियों तक नहीं पहुंचनी चाहिए. उन्होंने उन परिवारों को लाभ देने पर भी सवाल उठाए जो अपने बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में नहीं भेजते और ऐसे संस्थानों में भेजते हैं जहां 'वंदे मातरम' नहीं गाया जाता है.
ये भारी-भरकम फंड मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले टीएमसी सरकार लगातार केंद्र पर मनरेगा का पैसा रोकने का आरोप लगा रही थी. टीएमसी का दावा था कि केंद्र ने मनरेगा के तहत 17,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि रोक रखी थी और राज्य ने अपने फंड से भुगतान किया था.
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना था कि पुरानी योजना को लागू करने में कथित गड़बड़ियों के कारण फंड जारी करना रोक दिया गया था. अब नई योजना और इस बड़े बजट से पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी.