पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए संख्या बल तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के पक्ष में साफ तौर से दिखाई दे रहा है. विधानसभा में 223-225 विधायकों के साथ ममता बनर्जी की टीएमसी 5 में से 4 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करेगी. वहीं, 64-65 विधायकों वाली बीजेपी को स्वतंत्र रूप से 1 सीट जीतने के लिए जरूरी 49 वोट मिल जाएंगे, जिससे वह पहली बार अपनी ताकत पर राज्यसभा सदस्य भेजने में सक्षम होगी.
इससे पहले इन 5 सीटों में से 4 टीएमसी और 1 माकपा (CPI-M) के पास थी. विधानसभा में वामदल और कांग्रेस का प्रतिनिधित्व नगण्य होने के कारण विकास रंजन भट्टाचार्य की वर्तमान सीट उनके हाथ से निकलना तय है.
इस बार किसी भी गठबंधन की संभावना नहीं है, जिससे सीधे तौर पर टीएमसी को 4 और बीजेपी को 1 सीट मिलने का अनुमान है.
किसके पास कितनी ताकत?
राज्यसभा चुनाव पूरी तरह विधानसभा के आंकड़ों पर निर्भर है. टीएमसी के पास भारी बहुमत है, जो उसे 4 सदस्यों को संसद भेजने की ताकत देता है. बीजेपी के पास 64-65 विधायक हैं, जिनमें से एक सीट जीतने के बाद करीब 15-16 वोट सरप्लस (अतिरिक्त) बचेंगे.
हालांकि, ये अतिरिक्त वोट दूसरी सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जब तक कि कोई क्रॉस-वोटिंग न हो. दूसरी तरफ, वामदल और कांग्रेस के पास विधायकों की संख्या न होने के कारण वे दौड़ से बाहर नजर आ रहे हैं.
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टीएमसी के इन दिग्गजों का कार्यकाल हो रहा पूरा
टीएमसी की ओर से सुब्रत बख्शी और साकेत गोखले जैसे बड़े नाम चर्चा में हैं. सुब्रत बख्शी पार्टी के संस्थापक सदस्य और ममता बनर्जी के वफादार माने जाते हैं, जिन्होंने 2011 में ममता के लिए अपनी भवानीपुर सीट छोड़ी थी. वहीं, पूर्व पत्रकार साकेत गोखले पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर केंद्र सरकार को कानूनी और सोशल मीडिया के जरिए चुनौती देने वाला चेहरा रहे हैं. इनके अलावा ऋतब्रत बनर्जी भी हैं, जो पहले माकपा में थे और अब टीएमसी के श्रम विंग का नेतृत्व कर रहे हैं.
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मौसमी नूर का इस्तीफा और विकास रंजन की विदाई
मालदा क्षेत्र का प्रमुख चेहरा रहीं मौसमी बेनजीर नूर ने टीएमसी और राज्यसभा से इस्तीफा देकर फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया है. वहीं, माकपा के दिग्गज नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य की सीट इस बार खतरे में है. पेशे से सीनियर वकील विकास रंजन अक्सर अदालतों में राज्य सरकार के खिलाफ मामले लड़ते रहे हैं, लेकिन विधानसभा में माकपा के पास संख्या बल न होने की वजह से उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद यह सीट टीएमसी या बीजेपी के खाते में चली जाएगी.
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राज्यसभा की जंग और नए समीकरण
यह चुनाव बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत है क्योंकि बीजेपी पहली बार विधानसभा के आंकड़ों के दम पर राज्यसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी. वामदल के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि उनके संसदीय दल के नेता विकास रंजन भट्टाचार्य की जगह अब कोई अन्य दल का सदस्य लेगा. टीएमसी के लिए यह अपनी राष्ट्रीय उपस्थिति और विपक्षी आवाज को मजबूत करने का मौका होगा.