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लालू की आरजेडी हाफ, लेफ्ट-उद्धव-पवार का पावर साफ... राज्यसभा चुनाव की उलझी मिस्ट्री!

देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव में सियासी संतुलन बदलता दिख रहा है. इन राज्यों में विधानसभा की गणित बदल गई है, जिसका सीधा असर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ेगा. इन बदले सियासी समीकरणों का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकता है, जबकि क्षेत्रीय दलों के लिए राह मुश्किल है.

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राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव में शरद पवार, उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टियों को नुकसान होता दिख रहा है. (File Photo: PTI)
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव में शरद पवार, उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टियों को नुकसान होता दिख रहा है. (File Photo: PTI)

देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दांव पेच सेट किए जाने लगे हैं. कांग्रेस और बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल भरा लग रहा है. लालू यादव की आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक सीट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं बीआरएस और लेफ्ट का पूरी तरह सफाया हो रहा है. 

महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार की 5, पश्चिम बंगाल की 5, ओडिशा की 4 और असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 और हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के​ लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं. इन 37 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं. इसके अलावा 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. हालांकि, इन सीटों के लिए अब जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें सियासी गणित बदले हुए हैं, जिसमें एनडीए को लाभ तो इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को सियासी नुकसान हो सकता है. 

कांग्रेस-बीजेपी को फायदा तो घाटा किसे? 

बिहार से लेकर महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना विधानसभा की स्थिति पहले से काफी बदल गई है, जिसका सियासी असर सीधे तौर पर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है. देश के जिन राज्यों में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उसके लिहाज से देखें तो एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 होने की संभावना है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 से 15 हो सकती हैं. 

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राज्यसभा की इन 37 सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2 , AIADMK के पास 1, आरएलएम के पास 1 और 1 सीट आरपीआई के पास है. आगामी चुनावों के बाद बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती हैं, तो जेडीयू और AIADMK अपनी-अपनी सीटों को बचाए रख सकती हैं.

वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो चुनाव वाले 37 में से 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में हैं, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें हैं. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. आगामी चुनावों के बाद कांग्रेस को एक सीट का लाभ हो सकता है तो नुकसान शरद पवार की एनसीपी से लेकर उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टी को हो सकता है. ममता बनर्जी और डीएमके अपनी सीटें बचा ले जाएंगी.

चुनाव वाली 37 राज्यसभा सीटों में से 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं, जिसमें बीजेडी के पास 2 और 1 सीट बीआरएस और 1 सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है. आगामी चुनावों के बाद बीजेडी हाफ तो बीआरएस पूरी तरह साफ हो जाएगी. इसके अलावा वामदल भी अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे? 

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लालू की आरजेडी क्या हो जाएगी साफ

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. विधानसभा की मौजूदा स्थिति के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट पर सियासी मिस्ट्री उलझी हुई है. एनडीए के पास 202 विधायक तो महागठबंधन के पास 35 विधायक और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. इसका सीधे नुकसान आरजेडी को होता दिख रहा है. 

41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीतने के लिए एनडीए को 164 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे 3 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. बिहार के राज्यसभा चुनाव में जिस तरह की सियासी मिस्ट्री बन गई है, उसके लिहाज से आरजेडी को एक सीट जीतना भी मुश्किल दिख रहा है.

एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने की कवायद में है, जिसके संकेत जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने दे दिए हैं. विपक्ष अगर संयुक्त रूप से चुनाव लड़े तो जीत सकता है, पर AIMIM से लेकर बसपा तक का सियासी स्टैंड अलग ही राह पर दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी का राज्यसभ चुनाव में सफाया हो सकता है, क्योंकि AIMIM अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह रहा है. 

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पवार और उद्धव का पावर होगा कम

महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में वर्तमान में कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं. दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.

शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. महाविकास आघाड़ी में बातचीत कर आगे बढ़ेंगे, लेकिन असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में अपनी वापसी के फिराक में हैं, लेकिन नंबर गेम में पिछड़ रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों में से किसी एक को अपने कदम पीछे खींचने होंगे. 

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महाराष्ट्र में शरद पवार सहित एनसीपी (एसपी) के दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो उद्धव ठाकरे की पार्टी से प्रियंका चतुर्वेदी का टर्म पूरा हो रहा. शरद पवार की वापसी होती है तो एनसीपी को एक सीट का नुकसान होगा और उद्धव ठाकरे की पार्टी का सफाया हो जाएगा. शिवसेना अगर अपनी सीट बचाती है तो शरद पवार की राज्यसभा में वापसी नहीं हो पाएगी. इस तरह कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव महाविकास अघाड़ी के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं. 

लेफ्ट से बीआरएस तक का सफाया

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगी, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. इस तरह लेफ्ट का बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व अब राज्यसभा में नहीं रह जाएगा. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जो कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है. इस तरह लेफ्ट और बीआरएस का राज्यसभा में सफाया हो जाएगा. 

ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और बीजेडी को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है. इस तरह बीजेडी को दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें और एक सीट AIADMK  जीत लेगी, एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गण परिषद के पास एक सीट है. नए चुनावी समीकरणों के हिसाब से असम गण परिषद को अपनी सीट गंवानी पड़ सकती है. 

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छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेंगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ सकती है.

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