
बेल्जियम से चलकर उड़ीसा होते हुए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जा रही बायो पॉलीमर प्लांट की मशीन पिछले दो दिनों से चंदौली में रुकी हुई है. इसके पीछे वजह यह है कि आगे जाने के लिए इसे क्लियर रास्ता नहीं मिल रहा है और इसे सकुशल पास करने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है. फिलहाल, बायोपॉलीमर प्लांट की मशीन को लादकर चल रहा 308 पहियों वाला ट्रक चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड के निकट रुका हुआ है. लेकिन इसे देखने के लिए लोगों के उत्साह में कोई भी कमी नजर नहीं आ रही है. आसपास के लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के लोग भी इस 'महाबली' ट्रक को देखने के लिए यहां पहुंच रहे हैं और इस विशालकाय ट्रक और उस पर रखी मशीन के साथ सेल्फी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं. उधर इस ट्रक के साथ चल रहे लॉजिस्टिक्स मैनेजर के अनुसार, अगले दो से तीन सप्ताह में यह महाबली ट्रक अपने गंतव्य यानी लखीमपुर पहुंच जाएगा.
आपको बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड के किनारे खड़ा यह विशालकाय ट्रक और उस पर रखी यह मशीन बेल्जियम से चलकर लखीमपुर जा रही है. बताया जा रहा है कि पिछले अप्रैल के महीने में बेल्जियम से समुद्री रास्ते से यह विशालकाय मशीन चली थी और तकरीबन एक महीने के सफर के बाद में में उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंची. उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह से तकरीबन 2 महीने पहले ट्रक पर रख कर इस मशीन को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के लिए रवाना किया गया.

उड़ीसा से निकलने के बाद 308 पहियों वाला यह विशालकाय 'महाबली' ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में पिछले शुक्रवार को चंदौली पहुंचा. चंदौली होते हुए इसे वाराणसी की तरफ जाना था लेकिन चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे 19 पर बने रिंग रोड के पास इस ट्रक को रुकना पड़ा, क्योंकि आगे के लिए रास्ता नहीं मिल रहा था.
इसके बाद इस ट्रक के साथ चल रही लॉजिस्टिक टीम द्वारा फिलहाल इस ट्रक को गुजरने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है.ताकि यह ट्रक रिंग रोड के ऊपर की तरफ जा सके. 'आजतक' ने मौके पर मौजूद लॉजिस्टिक कंपनी के प्रबंधक अनेक भारती से एक्सक्लूसिव बातचीत की. बातचीत के दौरान अनेक भारती ने बताया कि यह बेल्जियम से उड़ीसा के पारादीप पोर्ट आया था. पारादीप पोर्ट से यह बाय रोड आ रहा है और लखीमपुर के बलरामपुर चीनी मिल कुंभी जाएगा.
अनेक भारती ने आगे बताया कि रास्ते में बहुत सारे अवरोध आ रहे हैं जिसको कंसर्न डिपार्टमेंट और अथॉरिटी से परमिशन के साथ क्लियर किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि यह एक रिएक्टर है लेकिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी देने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं. इसको ले जाने में बहुत तरीके के अवरोध आ रहे हैं. आप देख सकते हैं कि यहां भी काम चल रहा है. हाइट और चौड़ाई के रिलेटेड अवरोध हैं. उम्मीद की जा रही है कि 2 से 3 सप्ताह के अंदर यह लखीमपुर पहुंच जाएगा.

इस बीच 'महाबली' ट्रक और उसके ऊपर रखी विशालकाय मशीन को देखने के लिए लोगों की लगातार भीड़ जुट रही है. दो दिन पहले यह ट्रक जैसे ही उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश किया तब से जिस रास्ते से भी यह ट्रक गुजर रहा है वहां पर इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ पहुंच रही है. आसपास के लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के लोग भी अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं और जहां इस ट्रक के होने की खबर मिल रही है वहां पर पहुंच रहे हैं. चंदौली में रिंग रोड के पास जैसे ही यह ट्रक पहुंचा तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई.
ट्रक को देखने आई नीलम ने बताया कि यह ट्रक बहुत वायरल हो रहा है और मैं इसे देखने के लिए आई हूं. इतना बड़ा ट्रक और इतनी बड़ी मशीन मैंने पहले नहीं देखा था. बिहार के दुर्गावती से इस ट्रक को देखने के लिए पहुंचे अब्दुल वारिस ने बताया कि ये ट्रक-मशीन बहुत तेजी के साथ यह वायरल हो रहा है. ऐसे में सोचा कि हम भी चलकर देखते हैं कि आखिर ये चीज क्या है. आखिर इसमें क्या खूबी है? जो रास्ता बनाने के लिए ओवर ब्रिज तक को क्रेन से उठाना पड़ रहा है. अभी हम रिंग रोड के पास हैं और यहां पर सिक्स लेन का रोड है. इसे ये ट्रक पार नहीं हो सकता. क्रेन से भी जुगाड़ नहीं लगने वाला था. इसलिए इसके लिए रास्ता बनाया जा रहा है. देखेंगे कि यहां से ये कैसे गुजरता है.
वहीं, पास के ही गांव के रहने वाले मरीन इंजीनियर संजय यादव भी इस ट्रक को देखने के लिए पहुंचे थे. संजय यादव ने बताया कि हमने सुना कि 308 पहियों वाला ट्रक इधर आ रहा है तो उत्सुकता हुई. चूंकि, यह काफी वायरल हो रहा था. वैसे मैं खुद मरीन इंजीनियर हूं और जहाज पर तो इससे बड़े-बड़े सामान देखे हैं लेकिन यह जल के रास्ते होते हुए जमीन पर आया है.