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'अयोध्या पर आवाज, मथुरा पर चुप्पी', यूपी बीजेपी अध्यक्ष का अखिलेश यादव पर हमला

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद के बीच बीजेपी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर अखिलेश यादव की चुप्पी को तुष्टिकरण की राजनीति बताया है. सीएम योगी और पंकज चौधरी ने उनसे मथुरा पर रुख स्पष्ट करने को कहा. वहीं, अखिलेश ने अयोध्या जाने की बात कही, लेकिन मथुरा विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की.

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पंकज चौधरी बनाम अखिलेश यादव (Photo-AI-ITG)
पंकज चौधरी बनाम अखिलेश यादव (Photo-AI-ITG)

अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच, उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव से मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर उनकी 'चुप्पी' को लेकर सवाल किया. 'X' पर एक पोस्ट में चौधरी ने यादव पर निशाना साधते हुए कहा, 'अयोध्या पर आवाज उठाना और मथुरा पर पूरी तरह चुप रहना...!'

उन्होंने कहा, 'जहां वोट बैंक है, वहां आवाज है; जहां सच बोलने की जरूरत है, वहां चुप्पी है. यही सपा अध्यक्ष की राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत है.'

अखिलेश यादव के रुख पर सवाल उठाते हुए, चौधरी ने कहा, 'सवाल यह है कि मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर यह चुप्पी क्यों? क्या यह चुप्पी सिद्धांतों पर आधारित है या वोट बैंक की राजनीति की मजबूरी के कारण है?'

उन्होंने यह भी दावा किया कि सपा प्रमुख के 'चुनिंदा दर्द' को आसानी से समझा जा सकता है और इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति का असली चेहरा' बताया.

बीजेपी का यह हमला तब हुआ है जब यादव ने 7 जून को राम मंदिर में दिए गए दान में कथित हेराफेरी का मुद्दा उठाया था. प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.

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SIT की रिपोर्ट के आधार पर, कथित हेराफेरी के सिलसिले में आठ लोगों- अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ ​​टिन्नू यादव- को गिरफ्तार किया गया था. वे राम मंदिर में दान के तौर पर मिले नकद और कीमती सामान की गिनती करने के काम से जुड़े थे. सोमवार को अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

शनिवार को अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि मंदिर के दान में कथित गड़बड़ी से लोगों की आस्था के साथ धोखा हुआ है और कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह अयोध्या को एक 'बेमिसाल' धार्मिक और पवित्र शहर के रूप में विकसित करेगी.

रविवार को हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश से श्री कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा. अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, "अखिलेश जी, राम भक्तों ने अयोध्या को पहले ही बदल दिया है; अब मथुरा के बारे में बात करें. अगर आप सच में खुद को धार्मिक दिखाना चाहते हैं, तो मथुरा-वृंदावन और श्री कृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलें. आपको यह भी कहना चाहिए कि श्री राम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए भी अभियान चलाया जाना चाहिए.

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मुख्यमंत्री ने ने कहा, "एक बार पछतावा करें, राम लला के दर्शन करें और शायद इससे आपको सद्बुद्धि मिले. फिर तैयारी करें, ताकि हम भगवान कृष्ण के लिए भी कुछ कर सकें."

रविवार को प्रयागराज में जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इटावा में केदारेश्वर शिव मंदिर का काम पूरा होने के बाद वे भगवान राम के दर्शन के लिए अयोध्या जाएंगे. उन्होंने अयोध्या को लेकर बीजेपी पर कई आरोप भी लगाए, लेकिन मथुरा के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की.

श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद अभी अदालतों में लंबित है. हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह मस्जिद के ढांचे को हटाने, ज़मीन का कब्ज़ा लेने और श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग करते हुए 18 मुकदमे दायर किए हैं.

यह विवाद मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है. हिंदू याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इसे मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था; माना जाता है कि वह मंदिर भगवान कृष्ण का जन्मस्थान था. यह मामला अदालत में विचाराधीन है.

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