कानपुर के विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. इस मामले में पुलिस ने दवा कारोबारी की बहू के बाद अब उनके बेटे सुब्रत को भी गिरफ्तार कर लिया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई ठोस सबूतों के आधार पर ये साफ हुआ है कि सुब्रत भी इस हत्या की साजिश में सीधे तौर पर शामिल था.
बुधवार को सभी आरोपियों की रिमांड मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने खुद कई घंटों तक शालू, सुब्रत और विशाल को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की. हालांकि पूछताछ के दौरान सुब्रत ने हत्या में अपनी संलिप्तता से इनकार किया.
लेकिन पुलिस के हाथ ऐसे कई पुख्ता सबूत और कड़ियां लगी हैं, जिनके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई है.
जानबूझकर सीसीटीवी बंद करने का शक
पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि सुब्रत के घर का सीसीटीवी बीते 22 जुलाई से ही बंद था. पुलिस का मानना है कि ये महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि सबूत मिटाने या साजिश के तहत जानबूझकर किया गया हो सकता है.
घटना वाली रात की टाइमलाइन भी काफी संदिग्ध रही है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, रात 8:59 बजे सुब्रत और शालू घर से बाहर निकले थे. इसके बाद, रात 9:46 बजे विशाल और एक अन्य आरोपी विनीत मिनोचा के घर में दाखिल हुए. रात 9:56 बजे सुब्रत और शालू कॉसमॉस इन पहुंचे और फिर रात 10:58 बजे विनीत मिनोचा घर के अंदर गए.
सुब्रत पर 20 लाख से ज्यादा का कर्ज
पुलिस इन सभी गतिविधियों को इंटरलिंक करने में जुटी है. जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि सुब्रत भारी आर्थिक दबाव में था. उस पर कुल मिलाकर 20 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज था. इसमें मनी व्यू से करीब 5 लाख, ICICI बैंक से 75 हजार, नवी ऐप से 3 लाख और एक दोस्त हर्षित से लगभग 9.5 लाख रुपये का उधार शामिल है.
इसके अलावा, सुब्रत को पिता से महीने में करीब 25 हजार और शालू को 15 हजार रुपये मिलते थे, जो उनकी जरूरतों के लिए कम पड़ते थे.
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सुब्रत शराब पीने और जुआ खेलने का भी आदी था. वो फाइजर कंपनी की तरफ से मिलने वाले एक अवॉर्ड के लिए गोवा गया था, लेकिन वहां भी वो शराब और कैसीनो में मसरूफ रहा और नशे की वजह से अगले दिन अवॉर्ड सेरेमनी में शामिल तक नहीं हो पाया था.
विशाल और सुब्रत के बीच 258 से ज्यादा कॉल्स
पुलिस के रडार पर आरोपियों के कॉल डिटेल्स भी हैं. जांच में सामने आया है कि विशाल और शालू के बीच लगभग 28 बार बात हुई, जबकि विशाल और सुब्रत के बीच 258 से ज्यादा कॉल्स की डिटेल मिली है. हत्या से पहले और बाद में विशाल ने एक नए सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था, जिससे की गई पांचों कॉल्स सिर्फ सुब्रत के नंबर पर गई थीं.
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हैरानी की बात ये भी है कि जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज दिखाकर सुब्रत और शालू से विशाल की पहचान करानी चाही, तो उन्होंने उसे पहचानने से इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में शालू ने उसे पहचान लिया. अब पुलिस इन सभी कड़ियों को जोड़कर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खौफनाक वारदात के पीछे की असली और पूरी साजिश क्या थी.