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यूपी में निगम, बोर्ड और आयोगों में 100 से ज्यादा पद खाली, सीएम योगी की मंजूरी के चलते लटकी है नियुक्ति?

बीजेपी उत्तर प्रदेश में राज्य निकायों में बड़ी संख्या में खाली पदों की वजह से चुनौतियों का सामना कर रही है, और इन पदों पर पार्टी के नेता अपने करीबी लोगों को नियुक्त करने की कोशिश में हैं. हालांकि, कहा जा रहा है कि पार्टी और राज्य सरकार के बीच कम्युनिकेशन की कमी की वजह से इसमें देरी हो रही है.

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सीएम योगी. (फाइल फोटो)
सीएम योगी. (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ऐसी स्थिति का सामना कर रही है, जहां विभिन्न निगमों, बोर्डों और आयोगों में 100 से ज्यादा पद खाली हैं. ये पद आमतौर पर बीजेपी नेताओं और पदाधिकारियों के पास होते हैं. बीजेपी इन खाली पदों को भरने के लिए अपने करीब 100 नेताओं के नाम प्रस्तावित करने पर विचार कर रही है, जिससे उन्हें "माननीय" का दर्जा मिल जाएगा. 

बताया जा रहा है कि मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के लिए लंबित है. सीएम योगी अगर बीजेपी के प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हैं तो पार्टी के कई नेताओं को लामबंद कर संगठन को 10 सीटों पर उपचुनाव के लिए तैयार किया जा सकता है.

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पार्टी और सरकार के बीच कम्युनिकेशन की कमी

ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी है, जिसकी वजह से इन नियुक्तियों में टकराव और देरी हो रही है. बीजेपी का राज्य नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने के लिए आरएसएस के साथ संवाद और पैरवी कर रहा है.

कथित तौर पर बीजेपी ने 80 से ज्यादा नेताओं की लिस्ट तैयार की थी, जिन्हें वे इन खाली पदों पर नियुक्त करना चाहते थे, लेकिन अभी आखिरी फैसला लिया जाना बाकी है. ऐसा माना जा रहा है कि यह देरी सरकार और पार्टी संगठन के बीच समन्वय की कमी की वजह से हो रही है.

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इन आयोगों में नाम तैयार किए जाने के बाद भी नियुक्ति नहीं

बताया जा रहा है कि लिस्ट तैयार किए जाने के बाद भी महिला आयोग, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग समेत एक दर्जन से अधिक आयोगों और निगमों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियां अभी तक नहीं हुई हैं.

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हाल ही में किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सोनम किन्नर के इस्तीफा देने से एक और पद खाली हो गया है, और बीजेपी इस पद पर किन्नर समुदाय के किसी पार्टी कार्यकर्ता को जल्द से जल्द भरने की कोशिश कर रही है. इन खाली पदों को भरने में असमर्थता की वजह से कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है, जो इन नियुक्तियों की उम्मीद कर रहे थे.

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