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'Johny, Johny' के बाद अब 'Rain, Rain', यूपी के मंत्री को इन राइम्स से आपत्ति क्यों?

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अब अंग्रेजी नर्सरी राइम ‘रेन, रेन गो अवे’ पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यह कविता भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ है, क्योंकि इसमें बारिश को जाने के लिए कहा जाता है, जबकि भारतीय संस्कृति में वर्षा को शुभ और जीवनदायी माना जाता है.

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उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय. (Photo: PTI)
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय. (Photo: PTI)

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अब लोकप्रिय इंग्लिश नर्सरी राइम 'रेन, रेन गो अवे' (Rain Rain Go Away) पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि यह कविता भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे स्कूलों की किताबों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. मीडिया से बातचीत में योगेंद्र उपाध्याय ने कहा, 'यह क्या है? लिटिल जॉनी खेलना चाहता है, इसलिए बारिश को जाने के लिए कह रहा है. यह हमारी परंपराओं के खिलाफ है.'

मंत्री ने कहा, 'हमारी संस्कृति में बारिश का स्वागत किया जाता है, क्योंकि इससे सबका भला होता है. लेकिन यहां सिर्फ लिटिल जॉनी के खेलने के लिए बारिश को जाने को कहा जा रहा है. इसलिए इसे बच्चों की किताबों से हटाया जाना चाहिए.' मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने इंग्लिश नर्सरी राइम 'Johny, Johny Yes Papa' पर भी सवाल उठाए थे. 

उन्होंने कहा था कि यह कविता भारतीय संस्कारों को नहीं दर्शाती और बच्चों को माता-पिता से झूठ बोलना सिखाती है. कानपुर के मर्चेंट चैंबर हॉल में 6 मई को आयोजित शिक्षामित्रों, पैरा टीचर्स और संविदा शिक्षकों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपाध्याय ने कहा था कि शिक्षकों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों को नैतिक मूल्य और जीवन के संस्कार भी सिखाने चाहिए. उन्होंने भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी होना चाहिए.

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भाजपा नेता योगेंद्र उपाध्याय ने पश्चिमी और भारतीय संस्कृतियों की तुलना करते हुए कहा कि 'जॉनी, जॉनी यस पापा' जैसी कविताएं बच्चों को सही नैतिक शिक्षा नहीं देतीं. उन्होंने खास तौर पर 'ईटिंग शुगर? नो पापा' पंक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह बच्चों को माता-पिता के सामने झूठ बोलने की सीख देती है. इसके साथ ही उन्होंने पुरानी हिंदी कविताओं और बाल गीतों की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें जीवन मूल्यों और भारतीय संस्कृति की गहरी झलक मिलती थी.

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